झारखंड में राज्यसभा चुनाव की 2 सीटों के लिए 18 जून, गुरुवार को मतदान और मतगणना हुई. इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रत्याशी प्रणव झा चुनाव हार गए. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के बैद्यनाथ राम ने जीत हासिल की. सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जीत परिमल नाथवानी की रही. भारतीय जनता पार्टी ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा था लेकिन नाथवानी को समर्थन दिया था. एनडीए के पास जीते के लिए 4 वोट कम थे, हालांकि नाथवानी को जीत के लिए जरूरी 28 वोट मिल गए. 

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अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या झारखंड में भी इंडिया अलायंस के सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है?

झारखंड सरकार का क्या होगा?

इस संदर्भ में प्रभात खबर के सीनियर ब्यूरो चीफ आनंद मोहन ने एबीपी लाइव से बातचीत में कहा कि निश्चित तौर पर परिमल नाथवानी की जीत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए झटका है. प्रणव झा, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सलाहकार थे. इसका मतलब है कि वह कांग्रेस आलाकमान के कैंडिडेट थे. जीत के लिए उचित संख्याबल होने के बावजूद उनकी हार निस्संदेह इस ओर संकेत करती है आने वाले दिनों में झारखंड सरकार की स्थिरता पर असर पड़ सकता है. 

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झारखंड कांग्रेस के प्रभारी के. राजू के हवाले से आनंद मोहन ने कहा कि पार्टी इस हार के बाद समीक्षा करेगी. निश्चित रूप से यह बड़ा झटका है. के.राजू का दावा है कि राष्ट्रीय जनता दल और माले के विधायकों ने धोखा दिया है. 

राज्यसभा चुनाव की शुरुआत में ही हो गया था विवाद!

बता दें कि झारखंड में 2024 में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस, जेएमएम, राजद और वाम दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था.इस चुनाव में महागठबंधन को कुल 56 सीटें हासिल हुईं थीं. जिसमें जेएमएम को 34, कांग्रेस 16, राजद 4 और वामदल की 2 सीटें शामिल हैं. 

हालांकि इस गठबंधन में कई मौकों पर दरार का दावा किया गया. असम विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने कुछ सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. इतना ही नहीं हालिया राज्यसभा चुनाव में भी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने दोनों सीटों पर दावा किया था. 

जब कांग्रेस ने प्रणव झा के नाम का ऐलान किया था उस वक्त भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस के रुख पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एकतरफा प्यार करार दिया था. उन्होंने कहा था कि दोनों ही सीटों पर जेएमएम का स्वाभाविक अधिकार है. कांग्रेस के उम्मीदवार उतारने पर सुप्रियो ने गठबंधन धर्म की दुहाई भी दी थी. उन्होंने कहा था कि हमने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया, लेकिन बदले में हमें सिर्फ ठेस मिली है.