ॉभ्रष्टाचार-रोधी निकाय लोकपाल ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ दायर भ्रष्टाचार की शिकायत खारिज करते हुए उनके खिलाफ आरोपों को ‘निराधार’ तथा ‘परेशान करने वाला’ बताया है.

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लोकपाल ने अपने 134 पृष्ठों के आदेश में कहा कि इस मामले के शिकायतकर्ता भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी अमिताभ ठाकुर, सांसद के खिलाफ आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों को लेकर कार्यवाही करने योग्य तथ्य मुहैया कराने में विफल रहे हैं.

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली लोकपाल पीठ ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा, 'प्रतिवादी लोक सेवक (आरपीएस) के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार और परेशान करने वाले हैं.' पीठ ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता ने सवालों से बचने की भी रणनीति अपनाई है.

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निशिकांत दुबे के खिलाफ क्या है मामला?

आजाद अधिकार सेना पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर ने पिछले साल मई में दुबे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने दुबे पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया था.

आदेश में कहा गया कि शिकायतकर्ता ने 2009, 2014, 2019 और 2024 के चुनावों के दौरान दुबे की ओर से दिये गये हलफनामों पर भरोसा किया और मामले के आगे बढ़ने के साथ अपनी शिकायत में आरोपों को लगातार संशोधित किया.

ठाकुर ने अपनी शिकायत में दावा किया था कि दुबे की चल और अचल संपत्ति उक्त अवधि के दौरान कमोबेश स्थिर रही है, लेकिन 'उनकी पत्नी अनामिका गौतम की संपत्ति में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है'.

दुबे ने शिकायत को निराधार बताते हुए अपने जवाब में सभी आरोपों से इनकार किया था. उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी परामर्श सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में पेशेवर हैं और नियमित रूप से अपना आयकर रिटर्न दाखिल करती रही हैं.

ठाकुर इस समय उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला जेल में बंद हैं.

उन्हें पिछले साल 9-10 दिसंबर की दरमियानी रात को गिरफ्तार किया गया था. ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने 1999 में देवरिया के पुलिस अधीक्षक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अपनी पत्नी के नाम पर एक औद्योगिक भूखंड हासिल किया था.