आधी रात घर में घुसना और महिला के कपड़े उठाना 'रेप की कोशिश' नहीं! HC ने रद्द की सजा
झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव ने 27 साल पुराने 'अटेम्पट टू रेप' केस में दोषी को राहत देते हुए कहा कि रात में घर में घुसकर, महिला के कपड़े उठाकर उसे पकड़ लेने से अपराध साबित नहीं होता.

झारखंड हाई कोर्ट ने रेप के प्रयास यानी Attempt to Rape से जुड़े करीब 26 साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि केवल रात में महिला के घर में घुसना, उसके कपड़े उठाना और उसे पकड़ लेना, अपने आप में रेप के प्रयास का अपराध साबित नहीं करता. जब तक रेप करने की दिशा में कोई विशिष्ट और स्पष्ट प्रत्यक्ष कृत्य सामने न आएं, तब तक सबूत यह अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं कहे जाएंगे.
जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने निचली अदालत के फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए आरोपी को IPC की धारा 376/511 के तहत मिली चार साल की सश्रम कारावास की सजा को रद्द कर दिया है. अदालत ने मामले को महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से किए गए हमले यानी धारा 354 IPC के तहत माना.
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आरोपी के कृत्य को कोर्ट ने माना 'अश्लील'
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता की पूरी गवाही को देखने पर आरोपी की ओर से ऐसा कोई खास प्रत्यक्ष कृत्य सामने नहीं आता, जिसे रेप करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा सके. हालांकि, आरोपी का आचरण अश्लील हमला था, जिससे महिला की लज्जा भंग होने की आशंका थी.
मामला 27 दिसंबर 1999 की देर रात का है, जब पूर्वी सिंहभूम जिले के एक गांव में यह वारदात हुई. आरोपों के मुताबिक, महिला अपने घर में सो रही थी और उस समय घर में कोई पुरुष सदस्य मौजूद नहीं था. आधी रात के करीब आरोपी कथित तौर पर दरवाजा खोलकर कमरे में दाखिल हुआ और महिला के साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया. आरोप है कि उसने महिला के कपड़े उठाकर उसके साथ छेड़छाड़ की थी.
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