झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता चम्पाई सोरेन ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है. एबीपी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने ‘पेशा कानून’ के नाम पर आदिवासी समाज को धोखा दिया है. उनका आरोप है कि इस कानून के जरिए सरकार ने पारंपरिक माझी परगना व्यवस्था को कमजोर कर दिया और आदिवासी स्वशासन को बिचौलियों के हाथ सौंप दिया.
दुमका में आदिवासियों का महापर्व सोहराय पर्व में सम्मलित होनें दुमका पहुंचे थे. इधर सभा आदिवासियों की भीड़ देखते हुए आगामी 30 तारीख को संताल परागना के साहिबगंज में बैठक का आह्वान कर एक और समाज को बचाने के लिए हुल करने की बात कहीं.
पर्व पर हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं की उमड़ी भीड़
चम्पाई सोरेन ने कहा कि हेमंत सरकार द्वारा एक पतले से दस्तावेज में तैयार पेशा कानून समाज के मूल भावना की ना रीढ़ ही तोड़ दिया बल्कि संताल परगना में सुरक्षित मानी जाने वाली यहां की आदिवासी और मूल वासी के जमीनों से भी अधिकारों से वंचित होना पड़ेगा. दुमका एसपी कॉलेज मे इस पर्व को लेकर काफी धूम है. मांडर और झाल के थाप पर छात्राएं-छात्र नाच गाकर खुशी का इजहार कर रहे है.
पर्व पर हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूर्व सीएम चंपाई सोरेन, बिहार के कटोरिया विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के बेटे सहित कई नेताओ ने ढ़ोल मांडर बजा कर छात्राओं के साथ झूम उठे. पूरा एसपी कॉलेज मैदान परिसर में हर आदिवासी छात्र-छात्राओं के पैर ढ़ोल मांडर और वाद्य यत्रों के मधुर संगीत से थिरक रहे थे.
बड़े दिन के बाद शुरू होता है आदिवासियों का महापर्व
बता दें कि आदिवासियों का यह महापर्व दिसंबर में बड़ा दिन के बाद शुरू होता है जो मकर सक्रांति के दिन समाप्त हो जाता है. यह पर्व मुख्य रूप से किसी भी गांव में तीन से पांच दिनों तक मनाते है. जिसमें गांव का पूरा समाज शामिल होकर इस पर्व को बड़े ही शिद्दत से मनाते है. पर्व में आदिवासी समाज प्रकृति के साथ अपने पालतू जानवर गाय बैल की पूजा करते है. समाज की खुशी के लिए अपने पूर्वज के साथ आराध्य की पूजा अर्चना कर मुर्गा की बली दी जाती है. पूजा के बाद उस मुर्गे को खिचड़ी में मिलाकर प्रसाद के रूप में भोजन तैयार कर पूजा करने वाले लोग ग्रहण करते है. इस पुनीत पर्व में गांव समाज के आदिवासी समाज एक स्थान पर इकट्ठा होकर खुशी से नाचते गाते है.
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