झारखंड प्लेन क्रैश: 65% जल गए थे संजय, इलाज के लिए परिवार ने लिया था 7 लाख कर्ज, हादसे में मौत
Air Ambulance Crash: लातेहार के चंदवा निवासी संजय कुमार को 16 फरवरी को 65 फीसदी जलने के बाद रांची के एक अस्पताल लाया गया था. परिवार वालों ने बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाने का फैसला किया था.

झारखंड के रांची से मरीज को दिल्ली ले जा रही एक एयर एंबुलेंस सोमवार (23 फरवरी) को चतरा में जंगल वाले इलाके में हादसे का शिकार हो गई. झारखंड के एक होटल व्यवसायी की जिंदगी को बचाने के लिए उनके परिवार के सदस्यों ने 7 लाख रुपये से अधिक उधार लेकर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी ताकि उनका दिल्ली के टॉप अस्पताल में इलाज कराया जा सके. लेकिन कहते हैं न कि होनी को कौन टाल सकता है. परिवार अपने एक सदस्य की जान बचाने के लिए निकला था, एयर एंबुलेंस में मरीज और पायलट समेत 7 लोग सवार थे.
एयर एंबुलेंस में सवार मरीज समेत 7 की मौत
जानकारी के मुताबिक लातेहार जिले के चंदवा निवासी संजय कुमार शॉ (41) को 16 फरवरी को 65 प्रतिशत जलने के बाद रांची के एक अस्पताल लाया गया था. उनका अस्पताल में इलाज किया जा रहा था. परिवार वालों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला किया. एयर एंबुलेंस में मरीज संजय कुमार, उनकी पत्नी अर्चना देवी, रिश्तेदार ध्रुव कुमार, डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, नर्स सचिन कुमार मिश्रा, पायलट कैप्टन विवेक विकास भगत और कैप्टन सवराजदीप सिंह सवार थे.
खराब मौसम की वजह से हादसा!
रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से संचालित बीचक्राफ्ट सी90 एयर एम्बुलेंस ने रांची से शाम 7:11 बजे उड़ान भरी थी. करीब 20 मिनट बाद इसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. बताया जा रहा है कि खराब मौसम की वजह से विमान चतरा जिले के एक वन इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
होटल में आग लगने से झुलस गए थे संजय
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक संजय झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा में एक होटल चलाते थे. पिछले सोमवार को उनके होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी और संजय उसकी चपेट में आ गए. वे 65 प्रतिशत झुलस गए थे. रांची के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के श्री गंगा राम अस्पताल रेफर कर दिया. संजय की हालत सड़क के रास्ते यात्रा करने लायक नहीं थी, इसलिए उनके परिवार ने रिश्तेदारों से संपर्क किया और एयर एम्बुलेंस के लिए 7.5 लाख रुपये उधार लिए थे. दिल्ली में उनके इलाज के लिए भी कुछ पैसे अलग रखे गए थे.
सदमे में परिवार
संजय के बड़े भाई विजय शॉ उन्हें रांची हवाई अड्डे पर छोड़ने गए थे. उन्होंने बताया, "हम अभी घर पहुंचे ही थे कि हमें टीवी समाचारों से दुर्घटना के बारे में पता चला. सब कुछ एक पल में खत्म हो गया." परिवार ने बताया कि इस दुर्घटना में संजय और उनकी पत्नी अर्चना दोनों की मृत्यु हो गई और उनके दो बच्चे अनाथ हो गए. उनका कहना है कि अगर रांची में बेहतर इलाज की व्यवस्था होती तो संजय को एयरलिफ्ट करने की जरूरत ही नहीं पड़ती.
वहीं हादसे में जान गंवाने वाले डॉ. विकास कुमार गुप्ता के पिता बजरंग प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए अपनी सारी जमीन बेच दी थी. डॉ. गुप्ता रांची के सदर अस्पताल में तैनात थे. डॉ. विकास कुमार गुप्ता का एक सात साल का बेटा है.
Source: IOCL

























