दिल्ली की सत्य निकेतन की घटना ने देश भर में असुरक्षित और अवैध बनी इमारत पर बड़े सवाल खड़े किए है. दिल्ली की तरह ही जम्मू के वेयरहाउस इलाके में ऐसी इमारत में व्यापारिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं, जो सरकार द्वारा असुरक्षित घोषित किए गए हैं. जहां एक तरफ पूरे देश की नजरे सत्य निकेतन में हुए हादसे की तरफ है वहीं दूसरी तरफ जम्मू के वेयरहाउस इलाके की इन खंडहर इमारत को देखकर यह बात समझी जा सकती है कि इस इमारत में किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है.
शहर के बीचो-बीच बने वेयरहाउस की इन इमारत को सरकार ने औपचारिक तौर से असुरक्षित घोषित किया है. इन इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर जहां व्यापारिक प्रतिष्ठान चल रहे हैं वहीं इनकी ऊपर की दो मंजिलों पर सरकारी क्वार्टर बने थे.
इमारत के व्यापारिक प्रतिष्ठानों की तरफ सरकार का ध्यान नहीं
अब इसे सरकारी लापरवाही कहे या कुछ और सरकार ने जहां इन इमारत को असुरक्षित घोषित कर यहां क्वार्टर में रह रहे लोगों को क्वार्टर खाली करने के निर्देश दिए. वहीं इसी इमारत में चल रहे व्यापारिक प्रतिष्ठानों की तरफ सरकार का कोई ध्यान नहीं गया है. इन असुरक्षित इमारत में दर्जनों ऐसे व्यापारिक प्रतिष्ठान है, जहां पर कई दर्जन लोग काम करते हैं और रोजाना वह इन असुरक्षित दुकानों में पूरा-पूरा दिन निकलते हैं.
यहां काम कर रहे हैं लोगों का दावा है कि यह क्वार्टर खाली किए गए हैं और इमारत असुरक्षित है, लेकिन उसके बावजूद वह काम करने को मजबूर है. क्योंकि सरकार ने उन्हें कहीं और दुकान नहीं दी हैं. यह लोग दावा कर रहे हैं कि जिस तरह से क्वार्टर खाली कराए गए हैं, उसी तरह से अगर सरकार भी यह व्यापारिक प्रतिष्ठान खाली कराएं तो वह यहां से चले जाएंगे.
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आए दिन इन इमारत में से गिरतीं है सीमेंट सरिया और ईंटों
इन लोगों का दावा है कि उन्हें यहां काम करने में डर तो लगता है, लेकिन मजबूरी के चलते वह यहां काम कर रहे हैं. वही इन्हीं इमारत के पास काम कर रहे हैं कुछ और लोगों का दावा है कि उन्हें इस इमारत के पास जाने में डर लगता है. उनका कहना है कि आए दिन इन इमारत में से सीमेंट सरिया और ईंटों की दीवारें गिरकर नीचे आ जाती हैं और कई बार तो उनकी जान बाल-बाल बची है. यह लोग अब प्रशासन से किसी बड़े एक्शन की मांग कर रहे हैं ताकि यहां पर काम कर रहे हैं लोगों की जान को बचाया जा सके.
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