जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील राजौरी और पुंछ जिलों में आतंकवाद का फन कुचलने और तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक और अहम कदम उठाया है. सेना ने पहली बार पुंछ और राजौरी सेक्टरों में नियंत्रण रेखा (LOC) पर लगी कंटीली तारों के प्रवेश-निकास पॉइंट्स (Entry-Exit Gates) पर अत्याधुनिक एक्स-रे स्कैनिंग मशीनें और आधार-आधारित (Aadhaar-based) प्रवेश प्रणाली लागू कर दी है.
पाकिस्तान से सटी लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) के पास स्थित राजौरी और पुंछ जिले सुरक्षा बलों के लिए हमेशा से चुनौती रहे हैं. घने जंगलों की आड़ में आतंकी घुसपैठ करते हैं. सेना के अनुसार, पुंछ जिले में एलओसी पर हुई तारबंदी के उस पार (भारत की ओर ही, लेकिन बाड़ के आगे) करीब 40 से ज्यादा गांव स्थित हैं. इन ग्रामीणों को अपने घर जाने के लिए तारबंदी वाले गेट्स से गुजरना पड़ता है.
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आतंकियों की मदद करने का मिली थीं रिपोर्ट्स
सुरक्षा बलों को ऐसे अंदेशे और रिपोर्ट्स मिली थीं कि इन्हीं गांवों के कुछ लोग सीधे पाकिस्तान के संपर्क में थे और आतंकियों की मदद कर रहे थे. ये लोग आतंकियों तक हथियार (Arms) और नशीले पदार्थों (Narcotics) की सप्लाई पहुंचाते थे. पहले इन रास्तों पर कोई हाई-टेक जांच तंत्र नहीं था. सेना और पुलिसकर्मी ग्रामीणों और उनके सामान की मैन्युअल (हाथों से) तलाशी लेते थे, जो कि एक बड़ी चुनौती थी.
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
अब सेना ने इन प्रवेश-निकास द्वारों पर एक्स-रे बैगेज स्कैनर (X-ray Baggage Scanners) लगा दिए हैं और आधार-आधारित डिजिटल प्रमाणीकरण (Aadhaar-based verification) शुरू कर दिया है.
- स्मार्ट चेकिंग: एक्स-रे मशीनें बिना बैग खोले तुरंत बता देंगी कि अंदर कोई हथियार, विस्फोटक या नशीला पदार्थ तो नहीं है.
- त्वरित पहचान: आधार सिस्टम से व्यक्ति की डिजिटल पहचान तुरंत हो जाएगी, जिससे लंबी मैन्युअल प्रक्रियाओं की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी.
सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को बड़ी राहत
यह जन-केंद्रित (People-centric) पहल न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि तारबंदी के उस पार रहने वाले सैकड़ों आम नागरिकों को भी बड़ी राहत देगी. सालों से इन गेटों से गुजरने वाले ग्रामीणों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था. अब डिजिटल वेरिफिकेशन से उनका कीमती समय बचेगा और चेकिंग में होने वाली परेशानी खत्म होगी. सेना की पुंछ, भीमबर गली, राजौरी, नौशेरा और सुंदरबनी छावनियों ने पीर पंजाल क्षेत्र में इस प्रणाली को लागू करने में अग्रणी भूमिका निभाई है. सैन्य अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीक-आधारित पहल तस्करी पर लगाम लगाने, सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने और सीमावर्ती निवासियों के जीवन स्तर में सुधार लाने के सेना के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है.
