जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में एहतियाती प्रतिबंधों के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे. सोमवार को लगातार दूसरे दिन बंद के चलते घाटी में जनजीवन लगभग ठप रहा. कई स्थानों पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए जुलूस निकाले गए, जिन्हें रोकने के लिए पुलिस और अर्धसैन्य बलों को बल प्रयोग करना पड़ा.
घाटी में बंद का व्यापक असर
2 मार्च को दूसरे दिन भी बंद के कारण बाजार, परिवहन और दफ्तरों पर असर दिखा. संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अर्धसैन्य बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं. सभी शिक्षण संस्थानों में दो दिवसीय अवकाश घोषित किया गया और इंटरनेट की गति सीमित कर दी गई. प्रशासन ने एहतियातन कई इलाकों में सख्ती बढ़ा दी. स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए लगातार गश्त और निगरानी की गई. अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की.
कई रास्तों पर आवाजाही बंद
श्रीनगर में लालचौक, आबीगुजर, आलमगरी बाजार और लाल बाजार समेत कई इलाकों में आने-जाने के रास्ते बंद कर दिए गए. बारामुला, पट्टन, मांगाम, बडगाम, पुलवामा, शोपियां और बांदीपोर के शिया बहुल क्षेत्रों में भी आवागमन सीमित किया गया. प्रशासनिक पाबंदियों के बावजूद बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग जमा हुए. प्रदर्शनकारियों ने खामेनेई के पोस्टर और अमेरिका-इजरायल विरोधी नारे लिखे बैनर लेकर लालचौक की ओर मार्च करने की कोशिश की.
पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
बटमालू के पास पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और निषेधाज्ञा का हवाला दिया. सुरक्षाकर्मियों की अपील के बावजूद उत्तेजित भीड़ ने धक्का-मुक्की की और लगाए गए अवरोधकों को तोड़ दिया. कुछ प्रदर्शनकारी फिलस्तीन, ईरान और हिजबुल्ला के झंडे लिए हुए थे.
स्थिति बिगड़ती देख सुरक्षाबलों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे हिंसक झड़पें शुरू हो गईं. प्रदर्शनकारी बार-बार जमा होकर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, लेकिन लगभग एक घंटे की मशक्कत के बाद सुरक्षाकर्मियों ने हालात पर काबू पा लिया और भीड़ को खदेड़ दिया.
