नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायक संसद के मॉनसून सत्र से पहले दिल्ली जाएंगे और सत्र के पहले दिन संसद के बाहर प्रदर्शन करेंगे. वे केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर को फिर से राज्य का दर्जा देने का दबाव डालेंगे और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए संवैधानिक गारंटी की मांग करेंगे.

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NC विधायकों की सात घंटे चली बैठक

यह फैसला NC विधायकों की सात घंटे तक चली एक लंबी बैठक के दौरान लिया गया. इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने की, जिसमें NC और सहयोगी दलों के विधायकों के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों ने भी हिस्सा लिया. बैठक की जगह पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के आवास से बदलकर दाचीगाम नेशनल पार्क कर दी गई. इस कदम से पार्टी के नेता भी हैरान रह गए.

संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली पर जोर

बैठक के दौरान, पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली के लिए अपने राजनीतिक अभियान को और तेज करने का संकल्प लिया. बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए, NC के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, ''पार्टी राष्ट्रीय राजधानी में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी.'' उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की वापसी के हकदार हैं.

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जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाना पार्टी की प्राथमिकता- सादिक

सादिक ने कहा, "अब समय आ गया है कि हम वह सब वो वापस हासिल करें जो हमसे छीन लिया गया है." उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य का दर्जा वापस दिलाना पार्टी की सबसे पहली राजनीतिक प्राथमिकता बनी हुई है.

विधायकों का प्रतिनिधिमंडल सियासी दलों से मांगेगा समर्थन

NC के नेतृत्व ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से इस मुद्दे को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि विधायकों का प्रतिनिधिमंडल संसद सत्र के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों से समर्थन मांगेगा.

बता दें कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार का समर्थन करने वाले पांच निर्दलीय विधायकों को भी बैठक में आमंत्रित किया गया था, जबकि उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने वाले छह विधायकों वाली कांग्रेस को इसमें शामिल नहीं किया गया.

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