जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटने के आज सात साल पूरे हो गए. इस मौके पर सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने बुधवार (5 अगस्त) को श्रीनगर में अपने पार्टी हेडक्वार्टर पर विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन पार्टी प्रेसिडेंट डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत बड़े नेताओं की गैर-मौजूदगी ने विरोध प्रदर्शन की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए. 

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हालांकि, पार्टी नेताओं ने उनकी गैर-मौजूदगी का बचाव करते हुए कहा, ''डॉ. फारूक अब्दुल्ला दिल्ली में थे और बीमार थे, जबकि मुख्यमंत्री बाढ़ से प्रभावित पुंछ-राजौरी इलाके का खुद जायजा लेने के लिए आधिकारिक दौरे पर थे.''

NC ने की स्टेटहुड का दर्जा बहाल करने की मांग

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 2019 के फैसले को 'ब्लैक डे' (काला दिन) के तौर पर मनाया और जम्मू-कश्मीर के स्पेशल संवैधानिक दर्जे और पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग की. 

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सीएम उमर अब्दुल्ला ने पार्टी का रुख किया साफ

जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री और JKNC के वाइस प्रेसिडेंट उमर अब्दुल्ला अचानक आई बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित पीर पंजाल इलाके के आधिकारिक दौरे पर हैं. उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जम्मू-कश्मीर का स्पेशल दर्जा बहाल करने की मांग पर अपनी पार्टी का रुख साफ किया. उन्होंने कहा कि पार्टी ने 5 अगस्त के फैसले को न तो कभी स्वीकार किया है और न ही कभी करेगी.

सात साल हो गए, हम भूले नहीं हैं- उमर अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर आगे लिखा, "सात साल हो गए, हम भूले नहीं हैं और न ही हमने मौजूदा हालात से समझौता किया है. हमने उसे कभी स्वीकार भी नहीं किया है. मैं और मेरी पार्टी जम्मू-कश्मीर के साथ किए गए उन सभी कामों को पलटने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिन्होंने हमारे अधिकार छीन लिए और हमारी पहचान को खतरे में डाल दिया. 'जंगल सुंदर, घने और गहरे हैं. लेकिन मुझे अपने वादे पूरे करने हैं. सोने से पहले मीलों का सफ़र तय करना है."

NC के कई नेता और कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालने की कोशिश की

इस बीच, NC के कई नेता, विधायक (MLA) और पार्टी कार्यकर्ता श्रीनगर में पार्टी के मुख्य मुख्यालय 'नवा-ए-सुबह' में जमा हुए. हाथों में पोस्टर लिए प्रदर्शनकारियों ने पार्टी ऑफिस कॉम्प्लेक्स से एक पब्लिक मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन कड़ी सुरक्षा पाबंदियों की वजह से पुलिस ने उन्हें रोक दिया.

कैबिनेट मंत्री सकीना इत्तू ने की प्रदर्शन की अगुवाई

इस प्रदर्शन की अगुवाई कैबिनेट मंत्री सकीना इत्तू ने की. उन्होंने 5 अगस्त को 'बदकिस्मती का दिन' बताया, जब क्षेत्रीय अधिकार और गारंटियां छीन ली गई थीं. मंत्री सकीना इत्तू ने कहा, "हमारा रुख साफ है और पार्टी ने विधानसभा के अंदर और बाहर भी अपना रुख दोहराया है. पार्टी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा और कैबिनेट में प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार से पूरे संवैधानिक अधिकार बहाल करने की मांग की है."

PDP ने सांकेतिक तौर पर 'ब्लैकआउट' का रखा प्रस्ताव

नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह आंदोलन कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) जैसी दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर किए जा रहे अलग-अलग कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा था. जहां NC ने राज्य का दर्जा और विशेष अधिकार बहाल करने पर जोर दिया, वहीं PDP ने साथ ही जिले-स्तर पर प्रदर्शन किए और सांकेतिक तौर पर 'ब्लैकआउट' (बत्ती गुल करने) का प्रस्ताव रखा.

उधर, बड़े पैमाने पर स्थानीय तनाव और राजनीतिक लामबंदी को देखते हुए अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर उस दिन के लिए जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर अमरनाथ यात्रा के काफिलों और सुरक्षा बलों की आवाजाही रोक दी.

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