Mehbooba Mufti News: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार (20 मई) को कहा कि जो लोग पाकिस्तान से युद्ध चाहते हैं, वे सीमावर्ती क्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ आकर रहें और समझें कि युद्ध का क्या मतलब है. युद्ध अंतिम विकल्प भी नहीं है, उन्हें आगे बढ़ने के लिए वाजपेयी के सिद्धांत से प्रेरणा लेनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ''बीवी-बच्चे को लेकर कुछ दिन तंगधार, आरएस पुरा और पुंछ बॉर्डर पर रहो. फिर वार की बात करो. जिन्हें अपने घर के आंगन में दो-दो बच्चे दफन करने पड़े, उनसे पूछो युद्ध क्या होता है. युद्ध से किसी को कुछ नहीं मिलता है. जीरो मिला. दोनों तरफ आम लोगों की जानें गई.''

मुफ्ती ने कहा, ''जो चीजें कूटनीति से सॉल्व हो सकता है, वहां जंग की जरूरत नहीं है. जहां चाकू की जरूरत है, वहां आपने तलवार उठाया है. वाजपेयी जी (पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी) का डॉक्ट्रीन सबसे ज्यादा कामयाब रहा था. पहली बार जनरल मुशर्रफ ने पाकिस्तान में कहा था कि यूनाइटेड नेशन के रेजुलेशन को अलग रखकर जम्मू-कश्मीर के मामले का हल ढूंढेंगे.''

वाजपेयी ने कहा था कि इंसानियत के दायरे में हल ढूंढेंगे- मुफ्ती

उन्होंने कहा, ''वाजपेयी ने कहा था कि इंसानियत के दायरे में हल ढूंढेंगे. वाजपेयी ने कोई जम्मू-कश्मीर को उठाकर पाकिस्तान को नहीं दे दिया था. उन्होंने कोशिश की थी, जम्मू कश्मीर के लोगों की मुश्किलें कम करने की.''

पूर्व सीएम ने कहा, ''पीडीपी का गठन कश्मीर को रक्तपात से बाहर निकालने के लिए किया गया था और यदि स्थायी शांति हासिल करनी है तो कश्मीर विवाद को हल करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है.''

केंद्र के प्रतिनिधिमंडल पर क्या बोलीं महबूबा मुफ्ती?

उन्होंने पाकिस्तान को एक्सपोज करने के लिए विदेश दौरे पर भेजे जा रहे प्रतिनिधिमंडल को लेकर कहा, ''जो आज कई देशों में केंद्र सरकार प्रतिनिधिमंडल भेज रही है, वो पहले (पहलगाम हमले के बाद) करना चाहिए था. ये बताया जाना चाहिए था कि हमारे साथ क्या हुआ है, मुल्क के साथ क्या हुआ है.''  

महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान की तरफ से सीजफायर उल्लंघन किए जाने से हुए नुकसान को लेकर कहा कि पुंछ, तंगधार, उरी में लोगों को काफी दिक्कत है. लोगों को टैंट तक नहीं मिला. घर बर्बाद हो चुका है. लोगों को मदद करनी चाहिए. लोन का इंटरेस्ट माफ करना चाहिए. जो लोग शहीद हुए हैं, उनके घर में लोगों को नौकरी मिलनी चाहिए. 

लोग बंकरों की मांग कर रहे हैं- महबूबा मुफ्ती

उन्होंने कहा, ''मुझे पीड़ितों से मिलने का मौका मिला. मैंने लोगों से मुलाकात की और जहां भी मैं गया, लोग बिना किसी आश्रय के खुले में रह रहे थे. कठिन समय से गुजर रहे इन लोगों तक कोई राहत नहीं पहुंची है. सरकारी टीमें नुकसान हुई संपत्ति का आकलन नहीं कर रही है और मैं मांग करता हूं कि युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की जांच की जाए और उचित मुआवजा दिया जाए. सभी मृतकों को शहीद घोषित किया जाए तथा उन्हें नौकरी और अन्य राहत प्रदान की जाए.''

मुफ्ती ने कहा, ''21वीं सदी में जब लोगों को स्कूल और कॉलेजों की मांग करनी चाहिए थी, वे बंकरों की मांग कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि लोग सोचते हैं कि युद्ध हो सकता है और केंद्र सरकार को इन कष्टों को कम करना चाहिए.'' इस दौरान महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पहलगाम नरसंहार को अंजाम देने वाले आतंकवादी अभी भी फरार हैं, विदेश मंत्री का कहना है कि हमने उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी थी, इसका मतलब है कि आतंकवादियों को भागने का मौका दे दिया गया. मेरा मानना ​​है कि हम वापस उसी स्थिति पर आ गए हैं.