भारतीय रेलवे ने इंजीनियरिंग की दुनिया में एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसे देखकर पूरी दुनिया हैरान है. एफिल टावर से भी ऊंचे दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल—'चिनाब ब्रिज' (Chenab Bridge) पर देश की शान 'वंदे भारत एक्सप्रेस' (Vande Bharat Express) सरपट दौड़ती नजर आई है.

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बादलों के बीच और गहरी खाई के ऊपर से वंदे भारत का गुजरना सिर्फ एक ट्रेन का सफर नहीं है, बल्कि यह नए भारत की उस इच्छाशक्ति का प्रतीक है, जिसने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है. इस ऐतिहासिक पल के साथ ही कश्मीर घाटी का देश के बाकी हिस्सों से सीधे रेल संपर्क से जुड़ने का दशकों पुराना सपना अब पूरी तरह हकीकत में बदल गया है.

20 कोच वाली स्पेशल वंदे भारत, 1400 यात्री करेंगे सफर

गुरुवार (30 अप्रैल) सुबह 10:30 बजे जम्मू से रवाना हुई यह पहली सीधी ट्रेन दोपहर 3:30 बजे नौगाम रेलवे स्टेशन (श्रीनगर) पहुंची. इस ट्रैक की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए इस वंदे भारत ट्रेन को विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है.

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  • अब इसमें 8 के बजाय 20 कोच होंगे.
  • यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन (बुधवार को छोड़कर) जम्मू और श्रीनगर दोनों छोर से दिन में दो बार चलेगी.
  • एक फेरे में यह ट्रेन 1400 से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी.

कमांडो और 3000 कैमरों के साये में सुरक्षा

  • जम्मू और श्रीनगर के बीच 327 किलोमीटर लंबे इस संवेदनशील मार्ग पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे ने अभेद्य इंतजाम किए हैं.
  • ट्रेन में 'एक प्लस बीस' (1+20) गार्ड सिस्टम लागू किया गया है, जिसमें एक इंस्पेक्टर के नेतृत्व में 8 अत्याधुनिक हथियारों से लैस RPF (CORAS) कमांडो तैनात रहेंगे.
  • SSP रेलवे वसीम कादरी ने बताया कि हर 2 किलोमीटर पर गार्ड पोस्ट और 'क्विक रिएक्शन टीम' (QRT) तैनात की गई है.
  • ट्रैक और स्टेशनों की चप्पे-चप्पे पर निगरानी के लिए 3000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं.

पहले ही दिन 100% ऑक्यूपेंसी, परोसा जा रहा कश्मीरी खाना

इस नई रेल सेवा को स्थानीय लोगों और पर्यटकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है. परिचालन के पहले ही दिन ट्रेन में 100% यात्री क्षमता (Occupancy) दर्ज की गई. यात्रियों के सफर को और खास बनाने के लिए ट्रेन में डोगरी और कश्मीरी व्यंजनों सहित क्षेत्रीय खान-पान की सुविधा भी शुरू की गई है.

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43,780 करोड़ का प्रोजेक्ट, 36 सुरंगें और 943 पुल

उत्तरी रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, 327 किलोमीटर लंबी इस जम्मू-कटरा-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लाइन को लगभग 43,780 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया है. हिमालय के दुर्गम पहाड़ों को चीरकर बनाए गए इस रूट में 119 किलोमीटर लंबी 36 सुरंगें और 943 पुल शामिल हैं, जो इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना हैं.

उत्तरी रेलवे के मुख्य क्षेत्र प्रबंधक कपिल शर्मा ने इसे एक 'महान दिन' करार देते हुए कहा कि यह सीधा लिंक पर्यटन को संजीवनी देगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई उड़ान देगा. अब रेलवे लाइन को डबल करने का काम भी जोरों पर है, ताकि कश्मीर का पूरे देश से हर मौसम में निर्बाध संपर्क बना रहे.

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