Jammu News: पहलगाम हमने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बिगड़ रहे रिश्तों के चलते जम्मू में सीमावर्ती इलाकों के स्कूली बच्चों को बचाव के तरीके सिखाए जा रहे हैं. यह तरीका इन बच्चों को अचानक हुई फायरिंग से बचने के लिए सिखाए जा रहे हैं. 

भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बढ़ रहा है. इस तनाव के बीच जम्मू में सीमावर्ती इलाकों में रह रहे लोग अपने बचाव के तरीके भी अपना रहे हैं. चाहे वह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बंकरों की सफाई हो या फिर सीमा पर लगे खेतों में फसल काटना. अब जम्मू में सीमावर्ती इलाकों में स्कूली बच्चों को फायरिंग से बचने के तरीके सिखाए जा रहे हैं.

जम्मू के सीमावर्ती इलाके अरनिया के आखिरी गांव त्रैवा में इन दोनों स्कूली बच्चों को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है. यह ट्रेनिंग उन्हें पाकिस्तान की तरफ से हुई अचानक गोलाबारी से बचने के लिए दी जा रही है. स्कूली बच्चों को शिक्षक यह सीख रहे हैं कि अगर पाकिस्तान अचानक किसी हिमाकत पर उतर आता है और उसे समय वह स्कूल में है तो अपनी जान कैसे बचाया जाए. 

स्कूल प्रशासन इस बाबत एक मॉक ड्रिल भी करवा रहा है ताकि स्कूली बच्चों को अपनी जान बचाने के तरीके आसानी से समझाया जा सके. इन स्कूली बच्चों को फायरिंग के वक्त अपनी जान बचाने के लिए स्कूल में लगे डेस्क के नीचे छिपने की ट्रेनिंग दी जा रही है और अगर गोलीबारी ज्यादा होती है तो स्कूल में ही बन बंकर में छिपकर यह बच्चे जान कैसे बचा सकते हैं उसकी भी ट्रेनिंग दी जा रही है.

स्कूल के शिक्षकों के मुताबिक यह ट्रेनिंग बहुत जरूरी है क्योंकि जिस तरह की हिमाकत पाकिस्तान ने की है उसको उसका जवाब दिया जाना चाहिए. शिक्षक मानते हैं कि पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है जिस पर कभी विश्वास नहीं किया जा सकता और अगर पाकिस्तान किसी तरीके के दुस्साहस पर उतर आता है, तो इससे बच्चों को जान बचाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं. वहीं स्कूली बच्चों का दावा है कि वह पाकिस्तान की फायरिंग से अक्सर प्रभावित होते हैं और इस तरह की ट्रेनिंग उन्हें मुश्किल समय में जान बचाने के लिए मददगार साबित हो सकती है. 

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