जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या और कथित अवैध प्रवासियों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. जनसांख्यिकीय बदलावों के आरोपों की जांच और जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्र की एक उच्च स्तरीय समिति जल्द ही जम्मू का दौरा करेगी. यह समिति सीमावर्ती इलाकों समेत उन क्षेत्रों का दौरा करेगी जहां आबादी में बदलाव को लेकर शिकायतें सामने आई हैं.
जम्मू में रोहिंग्या और म्यांमार-बांग्लादेश से आए लोगों की मौजूदगी का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी लगातार उठाती रही है. बीजेपी का आरोप है कि इन इलाकों में बाहरी आबादी बढ़ने से सामाजिक और जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित हो रहा है. पार्टी इसे जम्मू की डेमोग्राफी बदलने की साजिश तक बता चुकी है.
अब केंद्र सरकार की टीम इस पूरे मामले का तथ्यात्मक अध्ययन करेगी और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को समझेगी. समिति प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेगी.
रिटायर्ड जस्टिस की अध्यक्षता में बनेगी रिपोर्ट
केंद्र की यह उच्च स्तरीय समिति सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर की अध्यक्षता में जम्मू पहुंचेगी. तीन दिनों के दौरे के दौरान समिति जम्मू संभाग के अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण करेगी. समिति में जनगणना आयुक्त के अलावा तीन विशेषज्ञ सदस्य भी शामिल हैं. इनमें दुर्गा शंकर मिश्रा, बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि शामिल हैं. टीम प्रशासन और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर जनसंख्या में हुए बदलाव और उसके कारणों की जानकारी जुटाएगी.
सीमावर्ती इलाकों का करेगी दौरा, घाटी जाने की योजना नहीं
सूत्रों के अनुसार, समिति जम्मू डिवीजन के उन क्षेत्रों का दौरा करेगी जहां रोहिंग्या और कथित बांग्लादेशी नागरिकों के बसने की बात सामने आई है. खासतौर पर सीमावर्ती क्षेत्रों पर टीम का फोकस रहेगा. फिलहाल समिति का दौरा केवल जम्मू संभाग तक सीमित रखा गया है. कश्मीर घाटी जाने की कोई योजना नहीं है, क्योंकि जनसंख्या में बदलाव से जुड़े आरोप मुख्य रूप से जम्मू क्षेत्र से ही सामने आए हैं.
रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा केंद्र
केंद्र सरकार की यह पहल जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलावों को लेकर उठ रहे राजनीतिक और सामाजिक विवाद के बीच महत्वपूर्ण मानी जा रही है. समिति की रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई और नीति को लेकर निर्णय ले सकती है. वहीं, स्थानीय स्तर पर भी इस दौरे को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. बीजेपी इसे लंबे समय से उठाए जा रहे मुद्दे पर केंद्र की गंभीरता के रूप में देख रही है, जबकि अब सभी की नजरें समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं.
