जम्मू-कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच जुबानी जंग अब एक नए स्तर पर पहुंच गई है. नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने बुधवार को विपक्ष के नेता सुनील शर्मा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने उमर अब्दुल्ला सरकार पर लगाए गए भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोपों पर करारा पलटवार करते हुए बीजेपी को जमीनी हकीकत समझने की नसीहत दी.
विपक्ष के नेता सुनील कुमार शर्मा ने बुधवार (13 मई) को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार की कड़ी आलोचना की थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि सरकार का मुख्यालय शायद मैराथन ट्रैक और गुलमर्ग के स्की स्लोप के बीच कहीं स्थित है. इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि मौजूदा सरकार में कुशासन और भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है.
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'मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रही BJP'
सुनील शर्मा के इन्हीं आरोपों पर पलटवार करते हुए तनवीर सादिक ने कहा कि BJP नेता जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक वास्तविकताओं से पूरी तरह कट चुके हैं. सादिक ने तंज कसते हुए कहा, "वे मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं. वे असम से आए हैं और जम्मू-कश्मीर की राजनीति को पूरी तरह भूल चुके हैं. मैं उनके घर जाऊंगा और उन्हें कॉफी पिलाऊंगा, ताकि वे नींद से जागें और यह समझ सकें कि यह जम्मू-कश्मीर है, असम नहीं."
उन्होंने आगे कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सत्ता में इसलिए है क्योंकि लोगों ने उसे वोट दिया है. जब पाँच साल बाद फिर चुनाव होंगे, तो NC एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी. यहाँ NC के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकता.
'बैकडोर नियुक्तियों का एक सबूत देकर दिखाएं'
सादिक ने विपक्षी पार्टियों द्वारा लगाए गए 'बैकडोर नियुक्तियों' (चोर-रास्ते से भर्ती) और भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने इन्हें "बेबुनियाद और घिसी-पिटी राजनीतिक बयानबाजी" करार दिया.
उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "अगर उनके पास कोई सबूत है, तो वे उसे सामने लाएं. पूरी दुनिया जानती है कि अतीत में 'बैकडोर नियुक्तियां' और तबादले किसने किए थे. वे हमारी सरकार या मंत्रियों द्वारा की गई एक भी अवैध नियुक्ति साबित करके दिखा दें."
PM मोदी की अपील पर भी दिया बयान
वैश्विक अनिश्चितता के दौर में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 'खर्च में कटौती' (Austerity Measures) को लेकर की गई अपील पर भी सादिक ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि हालात चिंताजनक हैं, लेकिन घबराने की ज़रूरत नहीं है. अगर एहतियाती कदम और खर्च में कटौती के उपाय सुझाए जा रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है. वीआईपी काफिलों को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में मंत्री और विधायक सुरक्षा चिंताओं के कारण ही सुरक्षा वाहनों के साथ यात्रा करते हैं.
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