जम्मू-कश्मीर में नायब तहसीलदार की परीक्षा के लिए उर्दू भाषा को अनिवार्य करने के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और नेशनल कांफ्रेंस हो गया है. इस मुद्दे को लेकर बीजेपी ने उमर सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया है.
हालांकि जम्मू-कश्मीर विधानसभा फिलहाल अनिश्चितकालीन के लिए स्थगित है, लेकिन सोमवार सुबह जम्मू विधानसभा में अचानक राजनीतिक हलचल तेज हो गई. जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बाहर बीजेपी के सभी 28 विधायक धरने पर बैठकर उमर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.
सभी परीक्षा देने वालों के लिए उर्दू को अनिवार्य बनाया गया
मुद्दा दरअसल जम्मू-कश्मीर नायब तहसीलदार की परीक्षा का था. इस परीक्षा को लेकर उमर सरकार के आदेश के मुताबिक, सभी परीक्षा देने वालों के लिए उर्दू को अनिवार्य बनाया गया, जिस पर बीजेपी भड़क गई.
दरअसल, पहले जब भी इस तरह की परीक्षाएं हुईं तो उनमें परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए उर्दू भाषा जानना जरूरी था, लेकिन यह पहला मौका है जब इन परीक्षाओं में अपनी किस्मत आजमा रहे लोगों के लिए उर्दू अनिवार्य कर दिया गया है.
जम्मू-कश्मीर में सभी रेवेन्यू रिकॉर्ड उर्दू में हैं - नेशनल कांफ्रेंस
इस मामले पर नेशनल कांफ्रेंस का तर्क है कि जम्मू-कश्मीर में सभी रेवेन्यू रिकॉर्ड उर्दू में हैं और ऐसे में जो भी रेवेन्यू डिपार्टमेंट में बतौर अफसर ज्वाइन करेगा, उसके लिए उर्दू जानना जरूरी है.
वहीं, बीजेपी का कहना है कि जम्मू संभाग में उर्दू का प्रचलन इतना ज्यादा नहीं है, ऐसे में जम्मू के अभ्यर्थियों के साथ यह अन्याय होगा. इस मुद्दे को लेकर सोमवार सुबह बीजेपी के सभी विधायक धरने पर बैठ गए और उमर सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया.
इस लड़ाई का क्लाइमेक्स अभी बाकी है - श्यामलाल शर्मा
बीजेपी के विधायक श्यामलाल शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे पर बीजेपी के विधायकों की हाल में ही उमर अब्दुल्ला से मुलाकात हुई थी, जिसके बाद उमर अब्दुल्ला ने उन्हें इस मामले को हल करने का आश्वासन दिया था.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस आश्वासन के बावजूद यह मामला अभी हल नहीं किया गया है और मजबूरन उन्हें प्रदर्शन की राह अपनानी पड़ी है. श्यामलाल शर्मा ने कहा कि यह अभी इस लड़ाई की शुरुआत है और इस लड़ाई का क्लाइमेक्स अभी बाकी है. उन्होंने कहा कि अगर इस मामले का हल नहीं किया जाता, तो वह अदालत तक का दरवाजा खटखटा सकते हैं
