जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 5 विधायकों के नॉमिनेशन (मनोनयन) के प्रावधान से जुड़े अहम मामले में शुक्रवार (17 अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की विशेष डिवीजन बेंच ने अहम दलीलें सुनीं.

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जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस राजेश सेखरी की पीठ ने इस जनहित याचिका (PIL) पर करीब आधे घंटे तक चली सुनवाई के बाद, मामले की अगली दलीलों के लिए 15 मई की तारीख मुकर्रर की है.

LG के अधिकारों और संवैधानिक वैधता पर उठे सवाल

यह जनहित याचिका प्रदेश कांग्रेस के पूर्व एमएलसी और मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने विधानसभा चुनावों के ठीक बाद अक्टूबर 2024 में दायर की थी. शुक्रवार को याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील पी.सी. सेन ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में नॉमिनेशन के प्रावधानों की संवैधानिक वैधता पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने तर्क दिया कि ये प्रावधान विधानसभा की स्वीकृत सदस्य संख्या से अधिक हैं और उपराज्यपाल (LG) को असीमित अधिकार देते हैं.

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'चुनी हुई सरकार को अल्पमत में बदलने का खतरा'

वकील पी.सी. सेन ने अपनी दलीलों को पुख्ता करने के लिए संविधान के कई प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया. याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि यह प्रावधान संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ यानी 'अल्ट्रा वायर्स' (संविधान के दायरे से बाहर) है. उनका कहना है कि इस प्रावधान के जरिए उपराज्यपाल को दी गई शक्तियों में इतनी क्षमता है कि वे एक चुनी हुई पूर्ण बहुमत वाली सरकार को अल्पमत में बदल सकते हैं, या इसके विपरीत स्थिति पैदा कर सकते हैं.

केंद्र का जवाब दाखिल, 15 मई को होगी अगली सुनवाई

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वकील से कुछ कानूनी सवाल भी पूछे. चूंकि याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलें अभी अधूरी हैं, इसलिए कोर्ट ने वकील से अगली तारीख पर अपनी दलीलें आगे बढ़ाने को कहा है. बता दें कि इस जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद ही कोर्ट ने भारत सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा था. केंद्र सरकार की ओर से अपना जवाब दाखिल किया जा चुका है और अब इस अहम मामले पर अंतिम सुनवाई चल रही है, जो अब 15 मई को आगे बढ़ेगी.

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