जम्मू-कश्मीर में जहां एक तरफ उमर अब्दुल्ला की अगुवाई वाली सरकार राज्य में प्रदर्शन कर रहे मेडिकल इंटर्न की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग का समर्थन कर रही है और छात्रों से बातचीत जारी रखे हुए है. वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों (GMCs) और हेल्थ इंस्टिट्यूट के प्रिंसिपलों ने हड़ताल कर रहे मेडिकल इंटर्न को प्रशासनिक चेतावनी और दबाव डालने वाले नोटिस जारी किए हैं.
ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) और स्थानीय छात्र समूहों के नेताओं के अनुसार, कई कॉलेज प्रशासन अलग-अलग छात्रों को डराने-धमकाने और उन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वे आंदोलन को खत्म कर दें. यह आंदोलन अब 10वें दिन में प्रवेश कर चुका है और कुछ मेडिकल इंटर्न अपनी मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
कॉलेज प्रशासन पर भड़के स्थानीय नेता
प्रदर्शन कर रहे छात्र डॉक्टरों ने बताया है कि अगर वे हड़ताल खत्म करके तुरंत क्लिनिकल ड्यूटी पर नहीं लौटते हैं, तो कॉलेज प्रशासन उन्हें सस्पेंड करने, नौकरी से निकालने या जबरन 180 दिन की इंटर्नशिप बढ़ाने की चेतावनी दे रहा है. SKIMS मेडिकल कॉलेज, बेमिना के प्रिंसिपल ने हड़ताल कर रहे इंटर्न के खिलाफ आधिकारिक तौर पर दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई 'शुरू कर दी है. क्षेत्रीय राजनीतिक नेताओं ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है और कॉलेज प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वे पाबंदी वाले एंट्री एफिडेविट का इस्तेमाल करके छात्रों को बंधक बनाने' की कोशिश कर रहे हैं.
इन कार्रवाइयों के कारण भारी राजनीतिक विरोध हुआ है और स्टाइपेंड को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में तनाव बढ़ गया है. दो हजार से ज्यादा छात्र - जिनमें 1720 स्थानीय छात्र और 300 से ज़्यादा विदेशी मेडिकल छात्र शामिल हैं, तब तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं जब तक कि स्टाइपेंड को 12,300 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये नहीं कर दिया जाता.
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इल्तिजा मुफ्ती ने साधा निशाना
श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी, जो अभी मध्य पूर्व की धार्मिक यात्रा पर हैं, उन्होंने मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों की कड़ी आलोचना की और उन्हें याद दिलाया कि ये उन्हीं के ट्रेनी हैं, जिन्होंने सालों तक उनके अंडर पढ़ाई की है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए, मेहदी ने न केवल इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण विरोध एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे संस्थागत चेतावनियों के जरिए दबाया नहीं जा सकता, बल्कि उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर इस जबरदस्ती को रोकने की मांग भी की है.
PDP नेता इल्तिजा मुफ्ती ने एक पोस्ट में SKIMS बेमिना मैनेजमेंट को निशाना बनाते हुए प्रशासन के कामों को 'शर्मनाक ब्लैकमेल' कहा. उन्होंने सवाल किया कि प्रशासन वादा किया गया स्टाइपेंड बढ़ाने के बजाय हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ की हड्डी को क्यों धमका रहा है?
कांग्रेस नेता ने भी की आलोचना
इसी तरह, कांग्रेस नेता आदिल फारूक मीर ने सरकार के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि 'धमकी, डराना-धमकाना और जबरदस्ती के निर्देश' छात्रों की मानी गई और जायज शिकायतों का जवाब नहीं हो सकते. इन चेतावनियों के बावजूद, इंटर्न अपनी बात पर अड़े हुए हैं. उन्होंने कहा है कि कोई भी ज़ुबानी भरोसा या धमकी उनके इरादे को नहीं तोड़ पाएगी. भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक कि सरकार लिखित और हस्ताक्षरित आदेश से ₹30,000 स्टाइपेंड बढ़ाने की गारंटी नहीं देती और उन्हें दंडात्मक कार्रवाई से बचाने का भरोसा नहीं देती.
इस बीच, नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता तनवीर सादिक ने घोषणा की कि हड़ताल कर रहे डॉक्टरों की मांगें जायज हैं और अगले कुछ घंटों में इनका समाधान हो जाएगा, क्योंकि आज डॉक्टरों के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य मंत्री के बीच बैठक होने वाली है.
मंत्री से मिलेगा इंटर्न्स का नया प्रतिनिधिमंडल
जम्मू-कश्मीर के इंटर्न डॉक्टरों का एक नया प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू से मिलने वाला है, ताकि वे मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की अपनी मांग को फिर से उठा सकें और इस मुद्दे पर औपचारिक सरकारी आदेश की मांग कर सकें. जानकारी के अनुसार, जम्मू का प्रतिनिधित्व करने वाले दो इंटर्न डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल बैठक में शामिल होने के लिए श्रीनगर जा रहा है. ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AIMSA) के अतिरिक्त सचिव डॉ. शाहनवाज़ और उमेर के जम्मू की ओर से चर्चा में शामिल होने की उम्मीद है और बैठक शाम करीब 4 बजे होने की संभावना है.
यह हालिया बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इंटर्न प्रतिनिधियों ने कुछ दिन पहले ही इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू से मुलाकात की थी. उस बातचीत के दौरान, मंत्री ने मामले को प्रोसेस करने और हल करने के लिए सरकार की ओर से एक महीने का समय मांगा था. हालांकि, इंटर्न प्रस्तावित समय-सीमा से सहमत नहीं थे और उन्होंने फिर से कहा कि उन्हें किसी और आश्वासन या लंबे इंतजार के बजाय सरकार का तुरंत लिखित आदेश चाहिए.
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