जम्मू-कश्मीर के डोडा से आम आदमी पार्टी के विधायक मेहराज मलिक ने सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने सोमवार (7 सितंबर) को जम्मू-कश्मीर प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों को डोडा ईस्ट के MLA मेहराज मलिक की उस याचिका पर विचार करने का निर्देश दिया, जिसमें एस्कॉर्ट गाड़ी के साथ उनकी सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई थी.

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मलिक के वकील के अनुसार, कोर्ट ने कहा, "MLA को होने वाले खतरे का आकलन करें और आदेश की तारीख से छह हफ्ते के भीतर इस पर कोई फैसला लें. बता दें कि SRCC एक खास संस्था है जिसे व्यक्तियों को होने वाले खतरे का आकलन करने और सुरक्षित या संवेदनशील लोगों के लिए सुरक्षा का सही स्तर तय करने के लिए बनाया गया है.

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जस्टिस संजय धर के सामने हुई सुनवाई 

कोर्ट का यह निर्देश MLA और आम आदमी पार्टी (AAP) के जम्मू-कश्मीर अध्यक्ष मेहराज मलिक की याचिका के जवाब में आया है, जिस पर सोमवार को जम्मू में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के जस्टिस संजय धर के सामने सुनवाई हुई.

याचिका में जम्मू-कश्मीर राज्य के अलावा, गृह विभाग के प्रधान सचिव; DGP जम्मू-कश्मीर; ADGP, IGP सिक्योरिटी जम्मू-कश्मीर; DIG डोडा-किश्तवाड़-रामबन रेंज; SSP (सिक्योरिटी) जम्मू और SSP डोडा को भी संबंधित पक्ष बनाया गया है.

राज्य की ओर से सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) मोनिका कोहली पेश हुईं, जबकि मलिक का पक्ष वकील अप्पू सिंह सलाथिया ने रखा. जब मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो अप्पू सिंह सलाथिया ने कहा, "27 अप्रैल 2026 को मलिक पर लगाए गए PSA को रद्द किए जाने के बाद से, राज्य ने एस्कॉर्ट गाड़ी के साथ उनकी सुरक्षा व्यवस्था बहाल नहीं की है, जबकि राज्य को उन्हें होने वाले सुरक्षा खतरे की जानकारी है."

विधायक को सुरक्षा का खतरा- वकील

मलिक के वकील ने बताया, "डोडा के MLA के राजनीतिक कामों में पूरे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अक्सर यात्रा करना, जमीनी स्तर पर बैठकें करना, लोगों से मिलना-जुलना और कई तरह की गतिविधियां शामिल हैं. वहीं याचिकाकर्ता (मलिक) को लगातार सुरक्षा का खतरा बना हुआ है.

सलाथिया ने कहा कि MLA के साथ भेदभाव किया गया, क्योंकि जम्मू-कश्मीर के बाकी सभी MLA को उचित सुरक्षा कवर के साथ एस्कॉर्ट गाड़ियां दी गई हैं. उन्होंने दावा किया कि याचिकाकर्ता को इसलिए परेशान किया जा रहा है, क्योंकि केंद्र की मौजूदा सरकार और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की सरकार के संबंध में उनकी राय अलग है. उन्होंने कोर्ट में यह भी कहा कि अब तक प्रतिवादियों ने बहुत ध्यान से तैयार की गई उनकी अर्जियों का कोई जवाब नहीं दिया है.

सलाथिया ने कोर्ट में कहा, "जम्मू-कश्मीर के DGP ने MLA की 3 अगस्त, 2026 की अर्जी का कोई जवाब नहीं दिया है. आतंकवादी गतिविधियों वाले इलाके से होने के कारण डोडा के MLA की जान को खतरा है और अगर कोई भयानक घटना होती है, तो इसके गंभीर नतीजे होंगे. उनकी सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ है, इसलिए उनकी सुरक्षा और एस्कॉर्ट गाड़ी को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए."

दोनों पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने किया निपटारा

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद, कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता की अर्जियों पर विचार करने का निर्देश दिया. साथ ही, SRCC से कहा कि वह याचिकाकर्ता MLA के लिए खतरे की आशंका की जांच करे और कोर्ट के आदेश की तारीख से छह हफ्तों के भीतर कोई फैसला ले.

27 अप्रैल, 2026 को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने मेहराज मलिक के खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत जारी हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया था और उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया था.

37 वर्षीय मेहराज मलिक को पुलिस ने 8 सितंबर, 2025 को पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत में लिया था. उन पर सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था और बाद में उन्हें कठुआ जिला जेल में रखा गया था.

यह हिरासत पुलिस की एक रिपोर्ट (डोजियर) पर आधारित थी, जिसमें 2014 से 2025 के बीच उनके खिलाफ दर्ज 18 FIR और 16 DDR का हवाला दिया गया था. इसके अलावा, इसमें एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट और अन्य सबूत भी शामिल थे. PSA रद्द होने और रिहाई के बाद, जम्मू-कश्मीर विधानसभा का आगामी ऑटम सेशन (पतझड़ सत्र) पहला ऐसा सत्र होगा जिसमें मलिक शामिल होंगे.

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