हजरतबल विवाद: 50 से ज्यादा लोग पुलिस हिरासत में, जम्मू कश्मीर में सियासी बवाल जारी
Ashoka Emblem Controversy: श्रीनगर के हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ वाली पट्टिका को नुकसान पहुंचाने के मामले में पुलिस ने 50 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है. वीडियो फुटेज की जांच जारी है.

श्रीनगर में हजरतबल दरगाह में अशोक स्तंभ वाली पट्टिका को क्षतिग्रस्त करने के संबंध में पूछताछ के लिए 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. अधिकारियों ने बताया है कि पुलिस ने शुक्रवार (5 सितंबर) को नमाज के बाद हुई घटना के वीडियो और सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसके बाद इन लोगों को हिरासत में लिया गया.
इस संबंध में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘अभी तक किसी को औपचारिक रूप से गिरफ़्तार नहीं किया गया है, लेकिन कुछ लोगों से पूछताछ की जा रही है.’’
दरख्शां अंद्राबी पर लगा गंभीर आरोप
दरअसल, बीते 5 सितंबर को हजरतबल दरगाह में लगाई गई अशोक स्तंभ वाली पट्टिका को कुछ अज्ञात लोगों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिसके बाद विवाद पैदा हो गया था. राजनीतिक दलों ने जम्मू कश्मीर वक्फ बोर्ड की प्रमुख दरख्शां अंद्राबी पर दरगाह में राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न का इस्तेमाल करके धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने तथा उन्हें तत्काल हटाने की मांग की.
अशोक स्तंभ चिन्ह का इस्तेमाल 'ईश निंदा'- महबूबा मुफ्ती
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न सरकारी समारोहों के लिए है, धार्मिक संस्थाओं के लिए नहीं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने इस चिह्न के इस्तेमाल को ईशनिंदा करार दिया. कुछ धार्मिक नेताओं ने दलील दी कि यह इस्लाम की शिक्षाओं के विरुद्ध है.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से नियुक्त जम्मू कश्मीर वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष अंद्राबी ने राष्ट्रीय चिह्न को हटाने वालों के खिलाफ जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) सहित विभिन्न धाराओं में कानूनी कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने शनिवार को इस घटना के संबंध में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ शांति भंग करने, दंगा करने और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया था.
उमर अब्दुल्ला ने वक्फ बोर्ड से माफी मांगने को कहा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''मैंने कभी किसी धार्मिक स्थल पर इस तरह से प्रतीक चिन्ह का इस्तेमाल होते नहीं देखा. मस्जिदें, दरगाह, मंदिर और गुरुद्वारे सरकारी संस्थाएं नहीं हैं. वक्फ बोर्ड को इस गलती के लिए माफी मांगनी चाहिए. राष्ट्रीय चिह्न सरकारी कार्यों के लिए है, धार्मिक संस्थानों के लिए नहीं.''
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Source: IOCL























