जम्मू कश्मीर में कैबिनेट विस्तार को लेकर सीएम उमर अब्दुल्ला ने बड़ा बयान दिया है. सीएम उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि मंत्रिमंडल के विस्तार पर फैसला दिल्ली से लौटने और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक़ अब्दुल्ला से बातचीत के बाद ही लिया जाएगा. कांग्रेस की इस शर्त के कारण कि "जब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं हो जाता" तब तक वे उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे, J&K मंत्रिमंडल का विस्तार लगभग दो साल से रुका हुआ है.

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श्रीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि फैसले में देरी हुई है क्योंकि वह GST काउंसिल की बैठक के लिए दिल्ली जा रहे हैं; संभावना है कि बैठक और पार्टी अध्यक्ष से बातचीत के बाद ही इस पर कोई निर्णय लिया जाएगा. सीएम ने बताया कि 8 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में GST काउंसिल की बैठक में शामिल होने के बाद आधिकारिक तौर पर बदलाव की प्रक्रिया शुरू होगी; वह इस बैठक में क्षेत्र के वित्त मंत्री के तौर पर शामिल हो रहे हैं.

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'फारूक अब्दुल्ला से चर्चा के बाद अंतिम फैसला'

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "मंत्रिमंडल विस्तार पर फ़ैसला पहले ही हो गया होता, लेकिन इस हफ़्ते दिल्ली में GST काउंसिल की बैठक तय है, इसलिए मैं लौटने और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फ़ारूक़ अब्दुल्ला से इस मामले पर चर्चा करने के बाद ही अंतिम फ़ैसला लूंगा."

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत, मंत्रिपरिषद की संख्या 90-सदस्यीय विधानसभा की कुल संख्या के 10% तक सीमित है. इसका मतलब है कि मंत्रिमंडल में ज़्यादा से ज़्यादा नौ मंत्री हो सकते हैं, लेकिन अभी मुख्यमंत्री सहित केवल 6 मंत्री हैं.

तीन खाली सीटों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि इससे व्यापक क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व मिलेगा और गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल बेहतर होगा. नेशनल कॉन्फ्रेंस का नेतृत्व श्रीनगर ज़िले से कम से कम एक मंत्री बनाने पर विचार कर रहा है ताकि राजधानी शहर का मंत्रिमंडल में सीधा प्रतिनिधित्व हो सके.

सूत्रों का यह भी कहना है कि तीन खाली सीटों में से एक कांग्रेस पार्टी को दी जा सकती है, और वरिष्ठ नेताओं तारिक़ हमीद कर्रा या ग़ुलाम अहमद मीर को मंत्री पद दिए जाने पर विचार किया जा रहा है. उम्मीद है कि विस्तार के दौरान मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर फेरबदल होगा; यानी नए सदस्यों को जगह देने के लिए मौजूदा मंत्रियों के कुछ विभाग बदले जा सकते हैं या उनसे वापस लिए जा सकते हैं.

दोहरी सत्ता प्रणाली पर सीएम उमर अब्दुल्ला ने कसा तंज

हाल ही में हुए बड़े प्रशासनिक बदलावों और तबादलों पर उमर ने केंद्र शासित प्रदेश में दोहरी सत्ता प्रणाली पर सवाल उठाए बिना तंज कसते हुए कहा कि अब उनकी सरकार नए अधिकारियों के साथ काम करने की कोशिश करेगी. उमर ने कहा, "यहाँ ऐसा ही होता है; चुनी हुई सरकार कुछ तबादलों के आदेश देती है, जबकि कुछ तबादले उप-राज्यपाल करते हैं. हम इस सिस्टम को बदल नहीं सकते." उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अलग-अलग विभागों में तैनात अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगी.

सरकारी मेडिकल कॉलेजों (GMCs) के लिए रुकी हुई भर्ती नियमावली के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि नियम लगभग तैयार हैं और उन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है. उन्होंने कहा, "बनाए गए नियमों और प्रस्तावित नियमों के बीच कुछ विरोधाभास थे. इन विरोधाभासों को दूर किया जा रहा है." उन्होंने कहा कि सरकार इस प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं करना चाहती और न ही इसे लागू करते समय किसी मुश्किल का सामना करना चाहती है. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि भर्ती नियमों की अधिसूचना जल्द ही जारी कर दी जाएगी.

खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में क्या कहा?

खेल इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में उन्होंने कहा कि सरकार जम्मू-कश्मीर के युवा खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग के मौके देने के लिए एक ही समय में सुविधाएं बढ़ा रही है और कोच नियुक्त कर रही है. उन्होंने बताया कि कश्मीर में ओलंपिक-साइज़ का स्विमिंग पूल बनाया गया है और साल भर ट्रेनिंग की सुविधा के लिए सोलर-पावर्ड हीटिंग का इंतज़ाम किया जा रहा है.

उन्होंने यह भी बताया कि एक इनडोर जिम्नास्टिक्स हॉल का उद्घाटन किया गया है; उन्होंने कहा कि कश्मीर के बच्चों ने जिम्नास्टिक्स में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन उनके पास इसके लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी थी. उन्होंने कहा, "हम क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी और वॉलीबॉल जैसे पारंपरिक खेलों से आगे बढ़कर अपने बच्चों को और ज़्यादा विकल्प और रास्ते देने की कोशिश कर रहे हैं."

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