सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (15 सितंबर) को वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी. साथ ही चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उसे पूरे कानून के प्रावधानों पर रोक लगाने का कोई मामला नहीं मिला. इस फैसले के बाद नए वक्फ कानून का विरोध कर रही पार्टियों ने खुशी जताई.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''नए वक्फ कानून को लेकर हम कहते रहे हैं कि एक ही मजहब के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. सिर्फ एक मजहब के प्रोपर्टी को कानून के दायरे में लाया गया. अच्छी बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को समझा है.'' 

हमें सौंप दें नेशनल हाईवे- उमर अब्दुल्ला

श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर सेब के ट्रकों को रोके जाने और कश्मीर घाटी में सेब किसानों व व्यापारियों के विरोध प्रदर्शन को लेकर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर केंद्र सरकार इसका रखरखाव नहीं कर सकती, तो उसे यह राजमार्ग जम्मू-कश्मीर सरकार को सौंप देना चाहिए.

उमर ने कहा, "राजमार्ग भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्हें इसे हमें सौंप देना चाहिए. मैं यहां मौजूद इंजीनियरों की एक टीम तैनात करूंगा."

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 3(1)(आर) के उस प्रावधान पर रोक लगा दी, जिसके अनुसार कम से कम 5 वर्षों से इस्लाम का पालन करने वाला व्यक्ति ही वक्फ बना सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक राज्य सरकार यह निर्धारित करने के लिए नियम नहीं बना लेती कि इस तरह की प्रथा का सत्यापन कैसे किया जाएगा.

शीर्ष अदालत ने वक्फ संपत्ति जांच के प्रावधानों पर आंशिक रूप से रोक लगा दी, जिसका अर्थ था कि किसी संपत्ति को केवल नामित अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर गैर-वक्फ नहीं माना जा सकता.