Jammu Kashmir: भद्रकाली मंदिर अब बना सांस्कृतिक केंद्र, कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए रखता है खास महत्व
Bhadrakali Temple: भद्रकाली मंदिर को NHPC की CSR पहल के तहत सांस्कृतिक विरासत केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. अधिकारियों ने मंदिर परिसर का दौरा कर विकास के लिए स्थलीय आवश्यकताओं का आकलन किया.

जम्मू में भद्रकाली मंदिर को सांस्कृतिक विरासत केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा. यह पहल एनएचपीसी की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत की गई है. ये मंदिर कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए काफी महत्व रखता है.
राहत एवं पुनर्वास आयुक्त (एम), जम्मू-कश्मीर डॉ. अरविंद करवानी, उपायुक्त (राहत) विजय कुमार शर्मा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (राहत) शिवानी भान और एनएचपीसी जम्मू एवं एनबीसीसी के क्षेत्रीय कार्यालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ, जम्मू के थलवाल में निक्की तवी नदी के तट पर स्थित माता भद्रकाली मंदिर परिसर का दौरा किया और इसे एक विरासत परिसर के रूप में विकसित करने हेतु स्थलीय आवश्यकताओं का आकलन किया.
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में समझौता पर हस्ताक्षर
राहत एवं पुनर्वास आयुक्त (एम), जम्मू-कश्मीर के कार्यालय ने इसके लिए राष्ट्रीय जल विद्युत निगम (एनएचपीसी) के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के तहत भद्रकाली मंदिर को एक सांस्कृतिक विरासत केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए एनएचपीसी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. राजभवन में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित एक कार्यक्रम में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए.
इस माता भद्रकाली मंदिर एक पूजनीय तीर्थस्थल है, जो विशेष रूप से कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है. यह उनकी अटूट आस्था और सांस्कृतिक संरक्षण का एक सशक्त प्रतीक है. यह मंदिर कश्मीर के हंदवाड़ा के वादीपोरा स्थित ऐतिहासिक भद्रकाली मंदिर का प्रतिरूप है. यह मंदिर देवी का नया घर माना जाता है, जो कश्मीर के बांडीपोरा स्थित भद्रकाली मंदिर की तरह है.
इतिहास, कला, वास्तुकला और विविधता के बारे में जानने का अवसर भी
इसके साथ ही प्रस्तावित सांस्कृतिक विरासत केंद्र का उद्देश्य समुदाय की परंपराओं, मूल्यों और रचनात्मकता का प्रतिनिधित्व करते हुए गौरव, अपनत्व और एकता की भावना को बढ़ावा देना है. करोड़ाें की लागत वाली इस परियोजना के अंतर्गत किए जाने वाले कार्यों में घाटों का विकास, पार्किंग का निर्माण, यज्ञशाला का निर्माण, सुरक्षा दीवार और परिसर की दीवार का निर्माण, मौजूदा भवन की फिनिशिंग और द्वार का निर्माण शामिल है.
इसे एक शैक्षिक संसाधन के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे छात्रों, विद्वानों और आगंतुकों को क्षेत्र के इतिहास, कला, वास्तुकला और विविधता के बारे में जानने का अवसर मिलेगा.
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Source: IOCL























