मिडिल ईस्ट में तनाव के बावजूद भारत से जारी रहेगी हज यात्रा, जम्मू-कश्मीर से चलेंगी फ्लाइट्स
Haj Yatra 2026: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत से हज यात्रा की उड़ानें निर्धारित समय पर चलेंगी. श्रीनगर से हज की उड़ानें 18 अप्रैल से शुरू होंंगी और 20 मई तक जारी रहेंगी

- जम्मू-कश्मीर से हज यात्रा निर्धारित समय पर, श्रीनगर से उड़ानें 18 अप्रैल से.
- हज समिति ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए किए अतिरिक्त प्रबंध.
- सऊदी अरब ने स्वास्थ्य संबंधी नए दिशानिर्देश जारी, स्मार्टवॉच से होगी निगरानी.
- क्षेत्रीय तनाव के बीच सऊदी अरब ने हज यात्रा का आश्वासन दिया.
अमेरिका की नौसेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के बाद ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. इसके बावजूद जम्मू-कश्मीर से हज यात्रा की उड़ानें निर्धारित समय पर चलेंगी. श्रीनगर से हज की उड़ानें 18 अप्रैल से शुरू होंंगी और 20 मई तक जारी रहेंगी. इस साल जम्मू-कश्मीर से कुल 4,704 तीर्थयात्री हज यात्रा पर जाने वाले हैं, जिसके चलते हज समिति ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय किए हैं.
हज समिति के कार्यकारी अधिकारी डॉ. शुजात अहमद ने बताया कि 3,990 हज तीर्थयात्री श्रीनगर से सीधे सऊदी अरब जाएंगे, जिनमें लद्दाख के 323 यात्री भी शामिल हैं. वहीं जम्मू-कश्मीर के 1,000 हज तीर्थयात्री दिल्ली के रास्ते सऊदी अरब जाएंगे और 50 तीर्थयात्री मुंबई से रवाना होंगे. उन्होंने कहा कि श्रीनगर से उड़ानें लगभग 10-15 दिनों तक संचालित होंगी, लेकिन परिचालन संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार उड़ानों के समय में बदलाव किया जा सकता है.
सऊदी अरब ने स्वास्थ्य को लेकर जारी किए नए दिशानिर्देश
अधिकारियों के अनुसार, सऊदी अरब ने स्वास्थ्य को लेकर नए दिशानिर्देशों जारी किए हैं. इसके तहत किडनी फेलियर, डायलिसिस या हृदय संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रहे तीर्थयात्रियों को यात्रा के लिए अयोग्य होंगे. उन्होंने बताया, "इस साल स्वयं खाना पकाने की सुविधा बंद कर दी गई है. इसके बजाय तीर्थयात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था समिति द्वारा की जाएगी." उन्होंने आगे कहा कि निगरानी और समन्वय के उद्देश्य से प्रत्येक तीर्थयात्री को एक स्मार्टवॉच दी जाएगी, जिसमें सिम-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम लगा होगा.
अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर हवाई अड्डे पर चल रहे मरम्मत कार्य के कारण फ्लाइट्स कम यात्री क्षमता के साथ संचालित होंगी, जिसके चलते मदीना जाने से पहले दिल्ली में ईंधन भरने के लिए रुकना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि सामान ले जाने की सीमा (बैगेज अलाउंस) को भी 40 किलोग्राम से घटाकर 25 किलोग्राम कर दिया गया है. अहमद ने बताया कि जम्मू और लद्दाख जैसे दूरदराज के इलाकों से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए हज हाउस में ठहरने की व्यवस्था की गई है, ताकि वो अपनी निर्धारित रवानगी से पहले वहां रुक सकें.
अमेरिका ने हज यात्रियों के लिए जारी की एडवाइज़री
हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उड़ानों का पूरा कार्यक्रम खाड़ी क्षेत्र में ज़मीनी स्तर पर मौजूद सुरक्षा स्थितियों पर निर्भर करेगा. सभी तीर्थयात्रियों को सलाह दी गई है कि वो अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करें. यात्रा में संभावित बाधाओं की आशंका को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग एक एडवाइज़री जारी की है. इसमें विभाग ने कहा है कि हज 2026 की यात्रा में जोखिम हो सकता है इसलिए अमेरिकी नागरिकों को इस यात्रा पर पुनर्विचार करने की सलाह दी गई है.
इस एडवाइज़री के पीछे हाल के युद्ध के बाद उत्पन्न हुई असुरक्षा की स्थिति का हवाला दिया गया है. इससे यात्रा में रुक-रुककर बाधाएं आ सकती हैं क्योंकि सीज़फायर पूरी तरह स्थिर नहीं है और यह अस्थिरता हज यात्रा के सुरक्षित रूप से संपन्न होने पर असर डाल सकती है.
क्या ईरान के तीर्थयात्री हज में हिस्सा लेंगे?
इस समय यह अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या ईरान के तीर्थयात्री हज में हिस्सा ले पाएंगे क्योंकि 40 दिनों तक चले संघर्ष की वजह से वहां बड़े पैमाने पर तबाही और अव्यवस्था फैली हुई है. इराक, लेबनान और कई दूसरे देशों के तीर्थयात्री भी क्षेत्रीय हालातों को देखते हुए अपनी हज यात्रा की योजनाओं पर फिर से विचार कर रहे हैं. ईरान हर साल हज के लिए लगभग 90,000 तीर्थयात्रियों को भेजता है. संघर्ष शुरू होने से पहले तेहरान ने अपनी 9 करोड़ से ज़्यादा की आबादी का हवाला देते हुए सऊदी अरब से अपने हज कोटे को बढ़ाने का आग्रह किया था, लेकिन इस संघर्ष की वजह से उसकी हज की योजनाएं प्रभावित हुई हैं.
सऊदी अरब ने सुरक्षा का दिया आश्वासन
हालांकि, सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर यह आश्वासन दिया है कि हज यात्रा तय योजना के अनुसार ही आगे बढ़ेगी. सऊदी के हज और उमराह मंत्रालय ने 2026 (1447 हिजरी) के लिए हज तीर्थयात्रियों की मेज़बानी करने की अपनी पूरी तैयारी कर ली है. पश्चिम एशिया जारी तनाव और सुरक्षा चिंताओं के बावजूद तैयारियां पूरी तरह से पटरी पर हैं. सऊदी अरब का कहना है कि लाखों मुसलमानों को सुरक्षित और आध्यात्मिक अनुभव देने के लिए वह प्रतिबद्ध है. उसने इस बात पर ज़ोर दिया है कि चाहे लॉजिस्टिक्स हो या भू-राजनीतिक चुनौतियां वह हज यात्रा की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएगा.
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