जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को लेकर एक बार फिर राजनीति गर्मा गई है. नेशनल कॉन्फ्रेंस सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला ने कहा है कि उनकी पार्टी का मुख्य एजेंडा प्रदेश में अनुच्छेद 370 की बहाली है ताकि यहां के लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा की जा सके.  

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फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार (27 अप्रैल) को मध्य कश्मीर के बडगाम में एक जनसभा को संबोधित करते राज्य के लोगों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के प्रति अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराई जिसमें वर्ष 2019 में केंद्र द्वारा निरस्त किए गए अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग शामिल है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संघर्ष से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है'. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि  जम्मू-कश्मीर में दोहरी सरकार प्रणाली केंद्र शासित प्रदेश के विकास के लिए हानिकारक है. 

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फारूक अब्दुल्ला ने कहा- केंद्र ने पूरा नहीं किया वादा

 उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस की नींव उसके समर्पित कार्यकर्ताओं और कश्मीर के शहीदों के बलिदान पर टिकी है, जिन्होंने लोगों की गरिमा, आत्मसम्मान और स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्योछावर किए. उन्होंने कहा कि चुनी हुई सरकार को डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने चुनाव के तुरंत बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का जो वादा किया था उसे नहीं निभाया है. फारूक अब्दुल्ला का बयान  जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय सम्मेलन के सांसद रुहुल्लाह मेहदी द्वारा राज्य सरकार पर अनुच्छेद 370 के मुद्दे और जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक संरक्षणों के लिए संघर्ष को कथित तौर पर त्यागने के आरोपों के बाद आया है. 

गौर हो कि केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटा दिया था. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था. अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को एक विशेष राज्य का दर्जा देता था, जिसके तहत राज्य का अपना संविधान था और केंद्र का कुछ मामलों को छोड़कर कानून सीधे यहां लागू नहीं होते थे. इसके अलावा बाहरी व्यक्ति यहां जमीन भी नहीं खरीद सकता था. 

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