जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को जानलेवा हमले (हत्या के प्रयास) से बचने के 24 घंटे के भीतर ही एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है. श्रीनगर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) अदालत ने गुरुवार (12 मार्च) को जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) घोटाला मामले में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया है. अदालत ने सीबीआई (CBI) द्वारा दर्ज इस मामले में अब्दुल्ला की पेशी से छूट की अर्जी को खारिज करते हुए यह सख्त कदम उठाया.

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वर्चुअल पेशी से भी इनकार, कोर्ट ने दिखाई सख्ती

गुरुवार (12 मार्च) को इस मामले में आरोप तय करने के लिए सुनवाई निर्धारित थी. फारूक अब्दुल्ला सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं हुए (कथित तौर पर वह जम्मू में थे). उनके वकील ने व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए एक अर्जी दाखिल की. श्रीनगर के CJM ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए आरोपी को वर्चुअल (ऑनलाइन) माध्यम से उपस्थित होने का विकल्प दिया था.

वारंट जारी: अदालत के आदेश के मुताबिक, बचाव पक्ष के वकील ने इस विकल्प पर सहमति नहीं दी और कहा कि आरोपी न तो शारीरिक रूप से और न ही वर्चुअल माध्यम से पेश हो सकता है. इसके बाद कोर्ट ने छूट की अर्जी खारिज कर दी और NBW जारी करने का निर्देश दिया.

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क्या है JKCA घोटाला मामला?

यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के फंड और कामकाज में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है. CBI ने इस मामले की जांच के बाद डॉ. फारूक अब्दुल्ला और कई अन्य आरोपियों के खिलाफ रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 406 और 409 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत चार्जशीट दायर की थी.

अब 30 मार्च 2026 को होगी अगली सुनवाई

इससे पहले 2 मार्च को अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि प्रथम दृष्टया फारूक अब्दुल्ला और अन्य आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध बनते हैं. कोर्ट ने 12 मार्च को आरोप तय करने और गवाहों के बयान दर्ज करने की तारीख तय की थी. अब गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद, मामले की आगे की कार्यवाही के लिए 30 मार्च, 2026 की तारीख मुकर्रर की गई है.