जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें साल 2000 में पिछली विधानसभा द्वारा पारित ऑटोनॉमी प्रस्ताव का जिक्र था. बीजेपी के विरोध के बावजूद, विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने चर्चा के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और अब इस पर सोमवार, 28 सितंबर को बहस होगी.

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सदन में विचार के लिए रखे गए इस प्रस्ताव में कहा गया है कि 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को विधानसभा द्वारा पारित प्रस्तावों के अलावा, सदन भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग करता है.

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि यह संकल्प लेता है कि इस प्रस्ताव को भारत सरकार को भेजा जाए. साल 2000 के ऑटोनॉमी प्रस्ताव के जिक्र पर बीजेपी सदस्यों ने आपत्ति जताई और सवाल किया कि ऑटोनॉमी का मुद्दा सदन में क्यों लाया जा रहा है.

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रखा पक्ष

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि ऑटोनॉमी प्रस्ताव (2000) और राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव (2024) का जिक्र इसलिए किया गया है क्योंकि वे विधानसभा के रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और किसी भी तरह की उलझन से बचने के लिए इनका जिक्र किया गया है. 

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के अधिकारों के लिए प्रयास जारी रखेगी. नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने 2024 के विधानसभा चुनाव घोषणापत्र में ऑटोनॉमी प्रस्ताव (2000) को लागू करने का वादा किया था. साथ ही, 26 जून 2000 के प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए ज्यादा ऑटोनॉमी की मांग की गई थी और बाद में संसद में भी इस पर चर्चा हुई थी.

बीजेपी ने लगाया ये आरोप

जैसे ही मुख्यमंत्री ने सदन में प्रस्ताव पेश किया, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थप-थपाकर इसका स्वागत किया. हालांकि, 2000 के प्रस्ताव के जिक्र पर बीजेपी सदस्यों ने विरोध किया और कहा कि वे सदन में ऑटोनॉमी के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं होने देंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि नियमों का उल्लंघन किया गया है क्योंकि मुख्यमंत्री ने सदन में प्रस्ताव पेश करने से पहले ही उसे पढ़ दिया था.

बीजेपी सदस्य सदन के बीचों-बीच (वेल में) आ गए और प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ दीं. बीजेपी विधायक आर एस पठानिया ने कहा, "हम सदन में ऑटोनॉमी के मुद्दे पर चर्चा नहीं होने देंगे." इस दौरान सदन में हंगामे के बीच कई विधायकों के बीच तीखी बहस हुई.

इस बीच स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीट पर बैठने का आग्रह किया, लेकिन हंगामा जारी रहा. सदस्यों ने एक-दूसरे पर तीखे कटाक्ष किए और कुछ के बीच हाथापाई भी हुई. इसके बाद, स्पीकर ने सदन की कार्यवाही पहले आधे घंटे के लिए और फिर सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी.

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