जम्मू-कश्मीर में लाइन ऑफ कंट्रोल पर तैनात कैप्टन अमन अली ने ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव मीडिया शेयर किया. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस सेक्टर में रेजीमेंट ऑफ आर्टिलरी का बहुत बड़ा योगदान था. हमने दुश्मन के टारगेट्स को बर्बाद कर दिया.
'सबने मिलकर दुश्मन के ऊपर फायर किया'
कैप्टन अमन अली ने कहा, "ऑपरेशन के दौरान हमारी आर्टिलरी की जो गन्स थीं उनको इस तरीके से एंप्लॉय किया गया था ताकि वो दुश्मन के बटालियन हेडक्वार्टर्स, गन एरियाज और लॉजिस्टिक्स इंस्टॉलेशन को टारगेट कर सकें और उनको बर्बाद कर सकें. इस चीज के लिए फायर डायरेक्शन के हमें आदेश मिले. आदेश मिलते ही हमारे गनर्स का जोश इतना ज्यादा हाई था, इतना ज्यादा कोऑर्डिनेटेड था कि सब लोगों ने मिलकर दुश्मन के ऊपर फायर किया और उनको बर्बाद किया."
'दुश्मन के सारे टारगेट्स को इंगेज किया'
इसके आगे उन्होंने कहा, "इन्होंने थोड़ी भी फिक्र नहीं की कि दुश्मन की इतनी भारी गोलीबारी हो रही थी तो उसमें भी उनका प्रोफेशनलिज्म और टेक्निकल प्रोफिसिएंसी वो इतना ज्यादा हाई था कि इन्होंने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया और अपनी सिक्योरिटी को न ध्यान में रखते हुए दुश्मन के सारे टारगेट्स को इंगेज किया और उनका जोश देखने बनता था."
बता दें कि दुश्मन को माकूल जवाब देने के लिए लाइन ऑफ कंट्रोल पर भारतीय सेना ने स्वदेशी डिफेंस तकनीक को सफलतापूर्वक तैनात किया. 'आत्मनिर्भर भारत' की पहल के तहत ये तैनाती की गई. यह ऑपरेशन मेड-इन-इंडिया आर्टिलरी गन की कार्यक्षमता में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ.