जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के सात साल पूरे होने पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य की राजनीतिक पार्टियों पर तीखा और परोक्ष हमला करते हुए कहा कि उन्हें आज कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं दिखा. साथ ही, उन्होंने दोहराया कि सरकार आतंकी नेटवर्क को खत्म करने और इसके दोषियों व मदद करने वालों को सज़ा दिलाने के लिए 'पूरी तरह से संकल्पित' है

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बुधवार को आतंकी हिंसा के शिकार लोगों के परिजनों को सरकारी नियुक्ति पत्र बांटने के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन सभी पात्र परिवारों के लिए ऐसी ही नौकरियां सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहा है.

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विरोध-प्रदर्शन को खारिज किया 

कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात करते हुए एलजी ने 5 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर विरोध-प्रदर्शन होने की बातों को खारिज कर दिया. सात साल पूरे होने पर कथित तौर पर हो रहे प्रदर्शनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा. अगर देखूंगा, तो आपसे इस बारे में बात करूंगा." उन्होंने 5 अगस्त को 'ऐतिहासिक महत्व' वाला दिन बताया और कहा कि यह उस 'भेदभावपूर्ण व्यवस्था' के अंत का प्रतीक है जिसे उन्होंने खत्म किया.

आतंकी नेटवर्क पूरी तरह खत्म होगा 

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार आतंकी नेटवर्क को खत्म करने और दोषियों व मदद करने वालों को सज़ा दिलाने के लिए 'पूरी तरह से संकल्पित' है. उन्होंने आतंकवादियों द्वारा मारे गए निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों को सलाम किया, जिन्हें 'दशकों के दुख और इंतजार' के बाद नियुक्ति पत्र मिले.

उन्होंने कहा, "आतंकवादियों द्वारा मारे गए निर्दोष नागरिकों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि और मैं उन परिवारों को सलाम करता हूं, जिन्हें दशकों के दुख और इंतजार के बाद अब ऐसे नियुक्ति पत्र मिले हैं जो सम्मान और आजीविका बहाल करते हैं."

हिंसा से प्रभावित परिवारों को नौकरी पाने का हक 

एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश के हर नागरिक के लिए शांति, समानता और उम्मीद भरी ज़िंदगी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, खासकर उन परिवारों के लिए जो आतंकी हिंसा से प्रभावित हुए हैं और जिन्होंने सालों तक इंतजार किया, जबकि कानूनी प्रावधानों के तहत वे अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पाने के हकदार थे.

उन्होंने कहा कि ये वे परिवार हैं जो आतंकी हिंसा का शिकार हुए थे. उनके परिजन लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. क्योंकि कानून ऐसे परिवारों को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान करता है. आगे कहा, "इस प्रक्रिया में काफी समय लगा, लेकिन हम ऐसे हर मामले की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हर पीड़ित परिवार के सबसे करीबी सदस्य को सरकारी नौकरी मिल सके."

नए युग की शुरुआत है 

मनोजं सिन्हा ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में नियुक्ति पत्र सौंपे गए. उन्होंने इस पहल को प्रभावित परिवारों को 'सम्मान के साथ जीने का मौका' देने की कोशिश बताया. उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, "2019 में भेदभाव के बादल छंट गए और सामाजिक न्याय तथा समावेशी विकास के एक नए युग की शुरुआत हुई." एलजी ने कहा, "आज जम्मू-कश्मीर नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और सर्वांगीण विकास से शांति और समृद्धि आ रही है."

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