Vikramaditya Singh Mandi: साल 1989 में 17 अक्टूबर के दिन पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर बेटे का जन्म हुआ. पिता की तरह ही बेटे विक्रमादित्य सिंह ने भी राजनीति में अपने पैर जमाए हैं. वे मंडी संसदीय क्षेत्र से भी चुनाव लड़ रहे हैं. हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह मंडी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी हैं.

शिकारी देवी में की थी पुत्र प्राप्ति की कामना

विक्रमादित्य सिंह ने प्रचार के दौरान करसोग स्थित शिकारी देवी के मंदिर पहुंचकर शीश नवाया. यह वही मंदिर है, जहां वीरभद्र सिंह ने पुत्र प्राप्ति के लिए प्रार्थना की थी. साल 1989 में वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री रहते हुए शिकारी देवी के दरबार में आए और पुत्र प्राप्ति की कामना की. इसके बाद वीरभद्र सिंह के घर पर बेटे का जन्म हुआ. वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने भी शिकारी देवी मंदिर की तस्वीर साझा करने के साथ यह किस्सा जनता तक पहुंचाया है.

55 साल की उम्र में घर पर बेटे का जन्म

वीरभद्र सिंह का जन्म 1934 में 23 जून को हुआ था. वीरभद्र सिंह ने दो शादियां की थी. अपनी पहली धर्मपत्नी रत्ना कुमारी के निधन के बाद वीरभद्र सिंह ने दूसरी शादी की. वीरभद्र सिंह की दूसरी शादी प्रतिभा सिंह से हुई. वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह के ही पुत्र विक्रमादित्य सिंह हैं. विक्रमादित्य सिंह का जन्म साल 1989 में हुआ.

साल 1989 में वीरभद्र सिंह की उम्र 55 साल थी. वीरभद्र सिंह पांच बार सांसद रहे और छह बार मुख्यमंत्री रहे. इसी तरह उनकी धर्मपत्नी भी तीन बार मंडी संसदीय क्षेत्र से सांसद रही हैं. दो बार विधायक का चुनाव जीतने के बाद विक्रमादित्य से अब अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. 

समुद्रतल से इतनी ऊंचाई पर है माता का मंदिर

शिकारी देवी माता का मंदिर समुद्रतल से 3 हजार 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. शिकारी शिखर की पहाड़ियों पर स्थित देवी का यह मंदिर आज भी छत से विहीन है. बर्फबारी होने के बाद भी यहां मूर्तियों पर बर्फ नहीं टिकती है. कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था. बर्फबारी के दौरान यहां श्रद्धालु दर्शन करने के लिए नहीं पहुंच पाते.

वीरभद्र सिंह ने सियासी जीवन में कुल 14 चुनाव लड़े

अपने 60 साल के राजनीतिक सफर के दौरान वीरभद्र सिंह ने कुल 14 चुनाव लड़े. वे आठ बार विधायक, छह बार प्रदेश के मुख्यमंत्री और पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे. वीरभद्र सिंह 1962, 1967, 1971, 1980 और 2009 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. इसके अलावा वे 1983, 1985, 1990, 1993, 1998, 2003, 2009, 2012 और 2017 में विधायक रहे. 1983, 1985, 1993, 1998, 2003 और 2012 में उन्होंने बतौर मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया.

उनकी स्कूली शिक्षा शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से हुई. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज से बीए ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. छह बार हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने 1962 से महासू लोकसभा क्षेत्र से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. 

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