हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री विक्रमादित्य सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है. यूपी-बिहार के अधिकारियों पर की गई उनकी टिप्पणी को लेकर अब IAS और IPS ऑफिसर एसोसिएशन ने मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. यहां तक कि उनकी अपनी ही सरकार के दो मंत्रियों ने भी इस बयान से पल्ला झाड़ लिया है.

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हिमाचल प्रदेश IAS एसोसिएशन ने मंत्री के बयान पर गहरी चिंता जताते हुए इसे 'विभाजनकारी' बताया है. एसोसिएशन का कहना है कि अधिकारियों को उनके मूल राज्य (जैसे यूपी-बिहार) के आधार पर अलग-थलग करना गलत है. इससे सिविल सर्विसेज के मनोबल और निष्पक्षता को नुकसान पहुंचता है. अधिकारी किसी राज्य की पसंद नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत 'ऑल इंडिया सर्विसेज' के सदस्य होते हैं. उनका धर्म बिना किसी भेदभाव के लोगों की सेवा करना है. एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि उच्च स्तर पर गाइडेंस जारी की जाए ताकि अधिकारियों की गरिमा की रक्षा हो सके.

IPS एसोसिएशन ने भी जताई कड़ी नाराजगी

IPS एसोसिएशन ने एक आपातकालीन बैठक बुलाकर एकमत से निंदा प्रस्ताव पारित किया है. एसोसिएशन ने कहा कि मंत्री का बयान हिमाचली और गैर-हिमाचली अधिकारियों के बीच दरार पैदा करने वाला है. ऐसे बयानों से पुलिस मशीनरी के अंदर अविश्वास पैदा होता है और सार्वजनिक गवर्नेंस पर बुरा असर पड़ता है. एसोसिएशन ने मांग की है कि भविष्य में ऐसे बयानों की पुनरावृत्ति न हो और सिविल सेवाओं की तटस्थता बनी रहे.

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सुक्खू सरकार के भीतर भी विरोध के स्वर

विक्रमादित्य सिंह के इस बयान ने सरकार को भी असहज कर दिया है. कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी और अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट रूप से इस बयान से किनारा कर लिया है. उन्होंने विक्रमादित्य सिंह को सलाह दी है कि वे इस तरह की बयानबाजी से बचें, क्योंकि यह राज्य के हित में नहीं है.

विवाद की मुख्य वजह

दरअसल, विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया था कि दूसरे राज्यों के आईएएस अधिकारी हिमाचल के हित में सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं. इस 'क्षेत्रीय कार्ड' को अधिकारियों ने देश की एकता और 'कोऑपरेटिव फेडरलिज्म' की भावना के खिलाफ माना है.

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश में यह पहली बार है जब एक साथ दो सबसे बड़ी प्रशासनिक एसोसिएशन ने किसी कैबिनेट मंत्री के खिलाफ इतनी कड़ी भाषा में लिखित विरोध दर्ज कराया है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस आंतरिक कलह और प्रशासनिक असंतोष को कैसे संभालते हैं.