Shimla News: शिमला में चौथे दिन भी नहीं उठा कूड़ा, सड़कों पर लगे ढेर, 10% वेतन बढ़ोतरी पर अड़े 800 सफाईकर्मी
Shimla News In Hindi: शिमला में सैहब सोसाइटी के सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से शहर में कूड़े के ढेर लग गए हैं. चार दिनों से कचरा न उठने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है.

राजधानी शिमला में पर्यटन सीजन (Tourist Season) के ठीक बीच एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा संभालने वाले सैहब (SEHB) सोसाइटी के 800 से ज्यादा कर्मचारी पिछले चार दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं.
हड़ताल के कारण हजारों घरों से कूड़ा नहीं उठ पाया है, जिससे शिमला की सड़कों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं और शहर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं (बीमारी) फैलने का खतरा बढ़ गया है.
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सफाई कर्मचारी शिमला डीसी ऑफिस (DC Office) के बाहर धरने पर बैठे हैं और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं. कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर जल्द उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र कर देंगे.
इस हड़ताल की 3 बड़ी बातें
- वेतन बढ़ोतरी की मुख्य मांग: कर्मचारियों का कहना है कि नियमों के मुताबिक उनके वेतन में 10% की बढ़ोतरी होनी चाहिए. नगर निगम ने शिमला की जनता के कूड़े के बिलों में तो 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है, लेकिन सफाईकर्मियों की सैलरी जस की तस है.
- कोरे आश्वासन से इनकार: सैहब सोसाइटी कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष जसवंत ने बताया कि निगम प्रशासन ने एजीएम (Annual General Meeting) बुलाकर मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया है. लेकिन कर्मचारी अब सिर्फ आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं; उन्हें अपनी मांगों पर ठोस फैसला चाहिए.
- शहरवासियों की बढ़ी टेंशन: चार दिन से कूड़ा न उठने से कॉलोनियों में बदबू फैलने लगी है. स्थानीय लोगों को डर है कि लगातार जमा हो रहा यह कचरा शहर में कोई बड़ी बीमारी न फैला दे.
क्या है सैहब (SEHB) सोसाइटी?
सैहब (Shimla Environment, Heritage Conservation & Beautification) सोसाइटी का गठन नगर निगम शिमला द्वारा साल 2009 में किया गया था. अप्रैल 2010 से इस सोसाइटी ने घर-घर जाकर कूड़ा उठाने का काम शुरू किया था.
- कुल कर्मचारी: 34 वार्डों में करीब 800 सफाईकर्मी.
- वर्तमान वेतन: इन्हें प्रति माह 12,700 रुपये से लेकर 15,000 रुपये तक का मानदेय मिलता है.
पर्यटन सीजन के पीक पर सफाई व्यवस्था का इस तरह चरमरा जाना शिमला प्रशासन के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. अब देखना यह है कि नगर निगम और हड़ताली कर्मचारियों के बीच यह गतिरोध कब खत्म होता है.
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