एशिया के सबसे घने जंगलों में शामिल शिमला का ये रहस्यमयी इलाका, पढ़ें अनोखी कहानी
Shimla News in Hindi: ढली क्षेत्र का वाटर कैचमेंट एरिया एशिया के घने जंगलों में शामिल है. यहां 125 साल पुराना सियोग वॉटर टैंक ग्रैविटी से शहर को पानी देता है. यह पर्यटन का नया शांत केंद्र बन रहा है.

शिमला से करीब 16 किलोमीटर दूर ढली के पास फैला 10 वर्ग किलोमीटर का वाटर कैचमेंट एरिया. जहां प्रकृति, इतिहास और इंजीनियरिंग एक साथ नजर आते हैं. अगर आप रिज और मॉल रोड की भीड़ से हटकर सुकून भरा अनुभव लेना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है. यही वह क्षेत्र है, जहां 125 साल पुराना सियोग वॉटर टैंक मौजूद है. जिससे आज भी शिमला शहर को करीब 1 करोड़ लीटर पानी मिल रहा है.
खास बात यह है कि यहां पानी की सप्लाई बिना किसी पंप या मोटर के, सिर्फ ग्रैविटी के जरिए होती है. ब्रिटिश दौर में यहां साफ-सफाई को लेकर इतनी सख्ती थी कि अधिकारी जब भ्रमण पर आते थे, तो कर्मचारी उनके साथ थूकने और टॉयलेट के लिए अलग से डिब्बा लेकर चलते थे. आज भी यहां थूकना और खुले में शौच पूरी तरह प्रतिबंधित है.
एशिया के सबसे घने जंगलों में से एक है कैचमेंट एरिया
कैचमेंट एरिया का सफर मुख्य गेट से शुरू होता है. इस ट्रैक को पैदल, साइकिल या इलेक्ट्रिक गोल्फ कार्ट के जरिए पूरा किया जा सकता है. रास्ते में घने जंगल, शांत वातावरण और प्राकृतिक नजारे इस यात्रा को खास बना देते हैं. कुफरी की ओर जाते समय हसन वैली सेल्फी प्वाइंट से जो घना जंगल दिखाई देता है, वही यह क्षेत्र है. इसे एशिया के सबसे घने जंगलों में गिना जाता है. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए कुछ सख्त नियम हैं. खाद्य सामग्री लाना मना है, कूड़ा फैलाना प्रतिबंधित है और ज्यादा शोर करने की भी अनुमति नहीं है, ताकि वन्य जीवन प्रभावित न हो. आरओ रुपिंदर शर्मा के मुताबिक, यह इलाका जैव विविधता से भरपूर है. यहां 166 देशी पौधों की प्रजातियां, 21 प्रकार के स्थलीय फूल, 146 पक्षियों की प्रजातियां और 54 प्रकार की तितलियां पाई जाती हैं.
प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति 150 रुपये है. छात्रों के लिए 100 रुपये, विदेशी पर्यटकों के लिए 300 रुपये और विदेशी छात्रों के लिए 200 रुपये निर्धारित किए गए हैं. साइकिल किराया 236 रुपये से शुरू होता है. वीडियो कैमरा के लिए 1000 रुपये और डिजिटल कैमरा के लिए 100 रुपये शुल्क रखा गया है. इलेक्ट्रिक गाड़ी का प्रति व्यक्ति किराया 500 रुपये है. ट्रैक पर आगे बढ़ते हुए दो वॉच टावर और कई व्यू पॉइंट मिलते हैं, जहां से हसन वैली का खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है. इसी रास्ते पर अंग्रेजों के समय बना सियोग रेस्ट हाउस भी है, जहां देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू समेत कई गणमान्य हस्तियां आ चुकी हैं. यहां रात में ठहरने की अनुमति नहीं है, केवल दिन में ही भ्रमण किया जा सकता है.
अंग्रेजों ने साल 1901 में तैयार किया था सियग वॉटर टैंक
साल 1901 में तैयार हुआ सियोग वॉटर टैंक अंग्रेजों की इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण है. इस क्षेत्र के करीब 18 प्राकृतिक जल स्रोतों में से नौ को इस टैंक से जोड़ा गया है. ढली से सियोग टैंक तक लगभग 7 किलोमीटर का रास्ता है और दिलचस्प बात यह है कि यह सड़क पानी की पाइपलाइन के ऊपर बनाई गई है. अंग्रेजों के समय यही पाइपलाइन एडवांस स्टडीज तक जाती थी और आज भी शहर को पानी की सप्लाई मिल रही है. फॉरेस्ट गार्ड विकास नेगी के अनुसार, इस टैंक को ढका नहीं गया है और इसमें पानी पहुंचाने के लिए किसी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता. इसकी स्वच्छता बनाए रखने के लिए पर्यटकों को विशेष अनुमति के बिना टैंक तक जाने की इजाजत नहीं है.
प्रकृति की गोद में बसा यह वाटर कैचमेंट एरिया न केवल शिमला की प्यास बुझा रहा है, बल्कि इतिहास और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रहा है. इसलिए अगली बार जब आप शिमला आएं, तो इस अनोखी जगह को अपनी यात्रा में जरूर शामिल करें और यहां के शांत, हरे-भरे माहौल का आनंद लें.
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