रजनी पाटिल के कंधों पर फिर हिमाचल कांग्रेस का भार, अब सामने होगी सबसे बड़ी चुनौती
Himachal Congress In Charge: हिमाचल कांग्रेस को नया प्रभारी मिल गया है. एक बार फिर रजनी पाटिल हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी बनायी गई हैं. पाटिल राज्यसभा सांसद भी हैं.

Himachal Pradesh Politics: हिमाचल कांग्रेस को नया प्रभारी मिल गया है. राज्यसभा सांसद रजनी पाटिल हिमाचल कांग्रेस की नई प्रभारी बनायी गई हैं. वे हिमाचल प्रदेश में राजीव शुक्ला की जगह लेंगी. राजीव शुक्ला साल 2020 में 12 सितंबर को हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए थे. उनके प्रभारी रहते हुए ही कांग्रेस विधानसभा चुनाव में उतरी और जीत हासिल की. अब राजनीति पाटिल के कंधों पर हिमाचल कांग्रेस का भार होगा. वे पहले भी हिमाचल कांग्रेस के प्रभारी रह चुकी हैं.
रजनी पाटिल के सामने फिर वही बड़ी चुनौती
रजनी पाटिल के कंधों पर सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने की होगी. लंबे वक़्त से सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के दावे तो किए जाते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में अंदरूनी कलह थमने का नाम नहीं ले रही है. इसके अलावा हिमाचल कांग्रेस में कार्यकारिणी का गठन भी होना है.
इसके बाद कार्यकारिणी का विस्तार करना भी एक बहुत बड़ी चुनौती रहने वाली है. रजनी पाटिल प्रभारी बनने के बाद हिमाचल प्रदेश का दौरा करेंगी और एक बार फिर पुराने दायित्व में नज़र आएंगी.
सरकार-संगठन में समन्वय स्थापित करने की चुनौती
सितंबर 2020 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने बड़े स्तर पर नए प्रभारियों की नियुक्तियां की थीं. तब रजनी पाटिल को हिमाचल प्रदेश की जगह जम्मू कश्मीर का प्रभार दिया गया था. अब एक बार फिर रजनी पाटिल को पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. पहले रजनी पाटिल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और तत्कालीन हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच समन्वय स्थापित करने में जुटी रही.
अब यही काम उन्हें मौजूदा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और मौजूदा हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के बीच करना होगा. पार्टी कार्यकारिणी का गठन न होने और सरकार में कथित तौर पर मंत्रियों-विधायकों के काम न होने से बड़ा असंतोष है. ऐसे में इस असंतोष को संतोष में बदलना भी रजनी पाटिल के सामने बहुत बड़ी चुनौती रहने वाली है. गौर हो कि 27 फरवरी 2024 को सरकार की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट कांग्रेस के छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को जिता दिया था. बाद में सभी छह तत्कालीन कांग्रेस विधायक भाजपा में भी शामिल हो गए थे.
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