HRTC कर्मचारियों का वेतन संकट गहराया, कई डिपो में सैलरी नहीं; चक्का जाम की चेतावनी बरकरा
Shimla News In Hindi: हालांकि कुछ डिपुओं में वेतन मिलने के बाद HRTC कर्मियों में शिमला में तो चक्का जाम नहीं किया.लेकिन अन्य डिपो में वेतन न मिलने पर बस सेवाओं को बंद करने की चेतावनी दी गई है.

हिमाचल प्रदेश में हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों ने वेतन न मिलने पर कड़ा रुख अपनाया है.बीते रोज 12 मई को HRTC कर्मियों के वेतन न मिलने पर आज के लिए लिए चक्का जाम की चेतावनी दी थी.जिसको देखते हुए HRTC प्रबंधन ने आनन फानन में शिमला के तीन डिपुओं के कर्मियों को तो वेतन जारी कर दिया -जबकि 26 HRTC डिपुओं में अभी भी वेतन नहीं मिला है.
हालांकि कुछ डिपुओं में वेतन मिलने के बाद HRTC कर्मियों में शिमला में तो चक्का जाम नहीं किया.लेकिन अन्य डिपुओं में वेतन न मिलने की स्थिति में बस सेवाओं को बंद करने की चेतावनी दी गई है.
कर्मचारियों को 125 करोड़ की देनदारियां
HRTC चालक परिचालक यूनियन के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने बताया कि कर्मियों कि ओवर टाइम और अन्य लगभग 125 करोड़ की देनदारियां लंबित हैं.समय पर वेतन न मिलने से बैंक लोन की किस्तें, बच्चों की स्कूल फीस और घर का खर्च चलाने में भारी दिक्कत आ रही है.यूनियन ने फ़िर दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले माह से पहली तारीख को वेतन नहीं मिलता है तो दो तारीख से चक्का जाम कर दिया जाएगा.जिससे होने वाली यात्रियों की परेशानी की जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन की होगी.
3200 से ज्यादा बसे चलतीं हैं
हिमाचल पथ परिवहन निगम के बेड़े में 3200 से ज्यादा बसें हैं.सरकार HRTC को 700 करोड़ से अधिक की ग्रांट सरकार हर वर्ष देती हैं.जिससे HRTC के वेतन भत्तों सहित अन्य पर खर्च किया जाता है.हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) ने 50 साल का सफ़र पूरा कर लिया है.1974 से अपना सफर शुरू करने वाली एचआरटीसी (HRTC) ने 50 वर्ष का सफर पूरा कर चुकी है.
HRTC राज्य में 31 डिपो के माध्यम से अपनी सेवाएं प्रदान करता है.HRTC में रोजाना पांच लाख से ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं.अब तक दो लाख के करीब यात्री रियायती HIM बस पास बनवा चुके हैं.राज्य सरकार छात्रों, कर्मचारियों और अन्य श्रेणियों के लिए रियायती या मुफ्त यात्रा की सुविधा भी प्रदान करती है, जिस पर सालाना ₹110 करोड़ से अधिक खर्च होते हैं.


























