हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष सामान्य से कमजोर रहने की संभावना जताई गई है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार जून से सितंबर 2026 तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम वर्षा होने की आशंका है. 

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अधिकांश क्षेत्रों में कम बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में मानसून सीजन (जून-सितंबर) के दौरान सामान्य वर्षा 734.4 मिलीमीटर रहती है. इस बार प्रदेश के ज्यादातर जिलों में वर्षा इस औसत से 92 प्रतिशत कम रह सकती है. किन्नौर जिले के कुछ क्षेत्रों में सामान्य बारिश होने की संभावना है, जबकि लाहौल-स्पीति और चंबा जिले के उत्तरी हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज किए जाने का अनुमान है.

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कृषि, बागवानी और जल स्रोतों पर संभावित प्रभाव

यदि यह पूर्वानुमान सही साबित हुआ तो प्रदेश की कृषि, बागवानी और जल संसाधनों पर विपरीत असर पड़ सकता है. सूखे की स्थिति बनने, फसलों और बागों में नमी की कमी तथा पेयजल संकट की आशंका बढ़ जाएगी. मौसम विभाग ने किसानों और बागवानों को नियमित मौसम अपडेट पर नजर रखने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है.

प्रशासन को भी संभावित जल संकट की स्थिति में पहले से तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ का असर जारी है. शनिवार को शिमला सहित कई क्षेत्रों में बारिश हुई. मौसम विभाग के अनुसार यह विक्षोभ 3 जून तक सक्रिय रह सकता है. ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात और निचले क्षेत्रों में वर्षा की संभावना है. मई महीने में प्रदेश में अब तक 44 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 26 प्रतिशत कम है. न्यूनतम तापमान में 1 से 3 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है.

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