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फ्री ट्रेड व्यापार से हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों पर संकट, CM सुक्खू ने जताई चिंता

Himachal News: श्रीनगर में सीएम सुक्खू ने कहा कि मुफ्त व्यापार समझौते हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के सेब उत्पादकों के हितों पर सीधा प्रहार हैं. आयात शुल्क में कटौती से विदेशी फल सस्ते होने आसार हैं.

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने श्रीनगर में प्रेस वार्ता में कहा कि हालिया मुफ्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के किसानों व बागवानों के हितों पर सीधा प्रहार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि ये समझौते सेब उत्पादकों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव डालेंगे.

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन समझौतों के कारण सेब, अखरोट, बादाम और अन्य फलों का आयात विदेशों से बढ़ेगा. इससे स्थानीय किसानों और बागवानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा. उन्होंने चेताया कि इसके प्रतिकूल प्रभाव आने वाले सालों में साफ दिखाई देंगे.

अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की बड़ी आबादी कृषि और बागवानी पर निर्भर है. ये दोनों क्षेत्र राज्यों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. सेब बागवानी हिमाचल की आर्थिकी का प्रमुख आधार मानी जाती है.

उन्होंने बताया कि हिमाचल में सेब बागवानी से लगभग 5,000 करोड़ रुपये का वार्षिक योगदान होता है. करीब 2.5 लाख परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं. इसके बावजूद केंद्र से कोई विशेष सहायता या समर्थन नहीं मिला है.

मुख्यमंत्री ने इसे बागवानों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि यह पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था पर सीधा आघात है. यदि आयात बढ़ता है तो स्थानीय उत्पाद प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे. इससे किसानों की आय पर व्यापक असर पड़ सकता है.

किन देशों से हुए समझौते?

सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने न्यूजीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ मुफ्त व्यापार समझौते किए हैं. इन समझौतों के तहत सेब और सूखे मेवों पर आयात शुल्क में कमी की गई है.

सेब पर आयात शुल्क में कटौती

सूखे मेवों पर शुल्क में राहत

विदेशी उत्पादों की बाजार में बढ़ती मौजूदगी

उन्होंने कहा कि आयात शुल्क में कमी से विदेशी सेब और मेवे सस्ते पड़ेंगे. इसका सीधा नुकसान हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के किसानों और बागवानों को होगा. ऐसे समझौते देश के किसानों और आम जनता के हित में नहीं हैं.

राजनीतिक प्रतिक्रिया और समर्थन

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार किसानों और आम जनता की आवाज उठा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उन्हें बोलने से रोकने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की आवाज दबाई नहीं जा सकती. कांग्रेस पार्टी किसानों और बागवानों के साथ मजबूती से खड़ी है. उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा.

पराक्रम चन्द 20 सालों से पत्रकारिता कर रहे हैं. हिमाचल की हर छोटी-बड़ी खबरों पर नजर रखते हैं. सियासी खबरों में खास दिलचस्पी रखते हैं. उन्होंने हिंदी में एम फिल हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी से किया है. उन्हें महर्षि नारद पुरस्कार से 2019 में सम्मानित किया गया.

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