Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में मंगलवार को निर्दलीय विधायकों की याचिका पर सुनवाई हुई. हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ के खंडपीठ में इस मामले पर सुनवाई की.

निर्दलीय विधायक कृष्ण लाल ठाकुर, होशियार सिंह और आशीष शर्मा की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह, जबकि हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील रखी.

शिमला शहर के विधायक ने भी दायर की थी याचिका

वादी और प्रतिवादी पक्ष को सुनने के बाद खंडपीठ ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है. शिमला शहर के विधायक हरीश जनारथा ने भी हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी. इस याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया था कि उन्हें भी इस मामले में सुना जाए.

कांग्रेस विधायकों ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा सचिवालय में तीनों निर्दलीय विधायकों की सदस्यता रद्द करने को लेकर भी याचिका दायर की है. इसी मामले को लेकर विधायक हरीश जनारथा चाहते थे कि उन्हें भी कोर्ट में सुना जाए, लेकिन इस याचिका को खंडपीठ ने अस्वीकार कर दिया.

जानें क्या है मामला?

बता दें कि 22 मार्च को तीनों निर्दलीय विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था. विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद तीनों निर्दलीय विधायक दिल्ली पहुंचे और 23 मार्च को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली.

23 मार्च को ही कांग्रेस के 12 विधायकों ने तीनों निर्दलीय विधायकों के खिलाफ शिकायत दी और विधानसभा अध्यक्ष कहा कि तीनों निर्दलीय विधायकों ने दबाव में आकर इस्तीफा दिया है. ऐसे में इस इस्तीफे की जांच की जानी चाहिए. इसी के बाद से तीनों निर्दलीय विधायकों का इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं हुआ है.

इसके बाद इस्तीफा स्वीकार न होता देख तीनों निर्दलीय विधायकों ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का रुख किया. विधायक हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं. फिलहाल सभी की नजरें हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के उसे फैसले पर आकर टिक गई हैं, जो फिलहाल रिजर्व रख लिया गया है.

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