'अंक ही नहीं, हुनर भी जरूरी', सीधे संवाद में छात्रों के सवालों पर खुलकर बोले CM सुक्खू
CM Sukhvinder Singh Sukhu News: सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने छोटा शिमला के सीबीएसई स्कूल में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों को देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थान बनाया जाएगा.

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू ने सोमवार (25 मई) को छोटा शिमला स्थित नव स्तरोन्नत सीबीएसई राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों के साथ सीधा संवाद किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों के सवालों के जवाब बेहद सहज और आम बोलचाल की भाषा में दिए. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार हिमाचल के सरकारी स्कूलों को देश के सबसे अच्छे स्कूल बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है.
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि वे यहां भाषण देने नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याएं और सुझाव सुनने आए हैं. उनका कहना था कि जब तक बच्चों से सीधे बातचीत नहीं होगी, तब तक शिक्षा व्यवस्था की कमियों को सही तरीके से समझा नहीं जा सकता.
शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावामुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव किए हैं और अब उनके अच्छे नतीजे भी सामने आने लगे हैं. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक बेहद योग्य और मेहनती होते हैं, क्योंकि उनकी भर्ती प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए होती है.
उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद यह है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी वही सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, जो बड़े निजी स्कूलों में मिलती हैं. इसी दिशा में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने और आधुनिक सुविधाएं देने पर जोर दिया जा रहा है.
छात्रों ने पूछे निजी जिंदगी और पढ़ाई से जुड़े सवाल
संवाद कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने मुख्यमंत्री से पढ़ाई, खेल, राजनीति और उनके जीवन से जुड़े कई सवाल पूछे. छात्र आरव ठाकुर ने पूछा कि स्कूल के दिनों में उनका पसंदीदा खेल कौन-सा था. इस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि वे हॉकी, क्रिकेट और हैंडबॉल खेलते थे. उन्होंने कहा कि वे अपनी हैंडबॉल टीम के कप्तान भी रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उन्हें ट्रैकिंग का काफी शौक रहा है और उनकी पहली ट्रैकिंग यात्रा टापरी से रिकांगपिओ तक हुई थी. इसके अलावा उन्होंने कहा कि स्कूल के समय में वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे.
स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठा
कार्यक्रम के दौरान एक छात्र ने स्कूल में भौतिकी विज्ञान के शिक्षक न होने और राजनीति विज्ञान के सिर्फ एक शिक्षक होने का मुद्दा उठाया. छात्रों ने मांग की कि खाली पदों को जल्द भरा जाए.
इस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि स्कूल अब सीबीएसई संस्थान बन चुका है और 30 जून से पहले सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि अब छात्रों को सीबीएसई पाठ्यक्रम के तहत ज्यादा विषयों के विकल्प भी मिलेंगे.
कक्षा 12 के छात्र दिव्यांश ने मुख्यमंत्री से पूछा कि आज के समय में जब बच्चे 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक ला रहे हैं, तब ज्यादा जरूरी क्या है अंक या कौशल?
मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि अच्छे अंक जरूरी हैं, लेकिन इसके साथ बच्चों का कुशल और सक्षम होना भी बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा कि सिर्फ किताबों की पढ़ाई ही काफी नहीं है, बल्कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए व्यवहारिक समझ और हुनर भी होना चाहिए.
एंटी-चिट्टा अभियान में युवाओं से सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे एंटी-चिट्टा अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की. उन्होंने कहा कि नशा माफिया पहले युवाओं को नशे का आदी बनाते हैं और बाद में उन्हें तस्करी में शामिल कर लेते हैं.
उन्होंने छात्रों से कहा कि अगर कहीं भी नशे से जुड़ी गतिविधियां दिखें तो तुरंत पुलिस को जानकारी दें. साथ ही समाज में जागरूकता फैलाने में भी आगे आएं. मुख्यमंत्री ने बताया कि 5 जून को शिमला में एंटी-चिट्टा रैली निकाली जाएगी और छात्रों से उसमें शामिल होने की अपील की.
मुख्यमंत्री ने सुनाई अपने संघर्ष की कहानी
कक्षा 7 की छात्रा राधा ने मुख्यमंत्री से उनकी राजनीति तक पहुंचने की यात्रा के बारे में पूछा. इस पर मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन के कई किस्से साझा किए. उन्होंने बताया कि जब वे कक्षा 10 में थे, तब स्कूल में हड़ताल हुई थी और उसी दौरान वे 17 साल की उम्र में कक्षा प्रतिनिधि बने.
बाद में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई के दौरान विभागीय प्रतिनिधि चुने गए. इसके बाद वे नगर निगम शिमला में पार्षद बने और फिर एनएसयूआई तथा कांग्रेस संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं.
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मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि उनके माता-पिता चाहते थे कि वे राजनीति छोड़कर नौकरी करें, क्योंकि उनके भाई-बहन नौकरी में थे. लेकिन उन्होंने संघर्ष का रास्ता चुना और आगे बढ़ते गए. उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे शिमला से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्हें नादौन से टिकट मिला.
कार्यक्रम के आखिर में मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को सफलता का मंत्र देते हुए कहा कि जीवन में अनुशासन, समर्पण और संघर्ष बहुत जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लगातार मेहनत करता है और अपने लक्ष्य पर फोकस रखता है, वही जीवन में सफलता हासिल करता है.


























