घर चलाने को माता-पिता करते हैं मजदूरी, अब बड़ी कलाकार बनने की राह पर बेटी वनिता पंवार
Shimla News: शिमला के पंथाघाटी में एक ऐसी बेटी हैं, जो कला की धनी हैं. वनिता पंवार के माता-पिता मजदूरी करते हैं और वे खुद बड़ी कलाकार बनने की राह पर हैं.

Himachal Pradesh News: 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता'. कहा जाता है कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां साक्षात देवता निवास करते हैं. भारत में बेटियों को देवी का साक्षात रूप माना जाता है. नारी शक्ति का भी पर्याय है. शिमला के पंथाघाटी उपनगर में रहने वाली बेटी वनिता पंवार भी ऐसी ही संघर्ष की कहानी को बयां करती हैं.
वनिता मूल रूप से झारखंड के गुमला जिले के गांव चुहरू की रहने वाली हैं और बचपन से ही शिमला में रह रही हैं. उनके पिता पुजार उरांव मिस्त्री हैं और मां राजकुमारी देवी लोगों के घर पर काम करती हैं. सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई करने वाली वनिता के सामने भी बड़ी चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने अपने मन में एक बड़ा कलाकार बनने की ठानी.
संघर्षों के बीच कलाकार का जन्म
आदिवासी मजदूर माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनकी चार संतानों में से एक बेटी कला के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएगी. गरीबी और अभावों का वातावरण वनिता के सामने बड़ी चुनौती था. शिमला के कारोबारी पंकज मल्होत्रा के पास घरेलू सहायिका के रूप में कार्यरत यह बेटी अब अपने सपनों में रंग भर रही है. वनिता पंवार बनाई पेंटिंग एवं अन्य कलाकृतियां अमीर लोगों के ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ा रही हैं.

घरेलू काम के बीच से वक्त निकलकर वनिता पेंटिंग बनाती है. वनिता बिहार की मधुबनी पेंटिंग, गुजरात व राजस्थान की लिप्पन आर्ट और तिब्बत की मंडला आर्ट बनाती हैं. वनिता अन्य बेटियों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत हैं.
उमंग फाउंडेशन भी करेगी मदद
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव वनिता को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगे हुए हैं. उनका कहना है कि उनकी संस्था वनिता को शिमला में अपनी कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाने में सहयोग करेगी. एक आदिवासी मजदूर परिवार की बालिका की प्रतिभा समाज के सामने आने दूसरी बेटियां भी उससे प्रेरणा ले सकेंगी.
शाम के वक्त घर के बाहर ही वनिता पेंटिंग और अन्य कलाकृति बेचती हैं. कई ऑर्डर उन्हें ऑनलाइन भी मिल रहे हैं. इसके अलावा भी आने वाले वक्त में अपने बिजनेस को ऑनलाइन माध्यम से बड़े स्तर पर फैलाना चाहती हैं.
वनिता ने एबीपी न्यूज से क्या कहा?
शिमला में एबीपी न्यूज़ के साथ खास बातचीत में वनिता पंवार ने बताया कि वह सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली एक लड़की रही हैं. स्कूल में बच्चों के बीच बोलने में भी डर लगता था. उस समय से ही ड्राइंग और पेंटिंग करना पसंद था. हालांकि कभी ड्राइंग या पेंटिंग करने की कोई ट्रेनिंग नहीं ली. धीरे-धीरे उन्होंने खुद ही यहकाम करना शुरू किया.
इसके बाद काम सीखने के लिए यूट्यूब की भी मदद ली. अब प्रोडक्ट और पेंटिंग अच्छे तरीके से बना लेती हैं. इसके लिए रिस्पांस भी अच्छा है. वह अन्य लड़कियों से भी आगे आकर इस तरह के काम करने की अपील कर रही हैं. वनिता कहती हैं कि जीवन में कुछ भी हासिल किया जा सकता है, अगर आलस त्याग दिया जाए. आज का काम कल पर छोड़कर पीछे नहीं हटना चाहिए. अच्छे काम की शुरुआत का कोई दिन नहीं होता. उसे आज और अभी ही शुरू किया जाना चाहिए.
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Source: IOCL



























