यमुनानगर: इंसानियत की मिसाल बने पालाराम, तपती धूप में नंगे पांव खड़े होकर राहगीरों की बुझा रहे प्यास
Yamunanagar News: यमुनानगर के पालाराम करीब 5 किलोमीटर दूर से सिर पर मटका रखकर पानी लाते हैं और इस भीषण गर्मी में सुनसान रास्ते पर प्यासों को रोककर पानी पिलाते हैं.

हरियाणा और हिमाचल की सीमा से सटे सुनसान जंगल में इंसानियत की ऐसी मिसाल देखने को मिल रही है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया है. भीषण गर्मी के इस दौर में जहां लोग घरों से निकलने से बच रहे हैं, वहीं यमुनानगर के पालाराम पिछले 12 वर्षों से राहगीरों की प्यास बुझाने में जुटे हुए हैं. नगली से रणजीतपुर गांव की ओर जाने वाले जंगल के रास्ते पर पालाराम रोजाना नंगे पांव खड़े होकर आने-जाने वाले लोगों को रोकते हैं और उन्हें ठंडा पानी पिलाते हैं.
पांच किमी दूर से सिर पर मटका रखकर लाते हैं पानी
जंगल के बीच बनी उनकी छोटी सी झोपड़ी में पांच बड़े मटके रखे हुए हैं, जिनमें हमेशा पानी भरा रहता है. खास बात यह है कि यह पानी किसी पाइपलाइन या टैंकर से नहीं आता, बल्कि पालाराम खुद करीब पांच किलोमीटर दूर से सिर पर मटका रखकर पानी लेकर आते हैं.
प्यासे को पानी पिलाकर मुझे शांति मिलती है- पालाराम
पालाराम बताते हैं कि उन्होंने यह सेवा सिरसा वाले बाबा के कहने पर शुरू की थी. शुरुआत में उन्होंने सोचा भी नहीं था कि यह काम इतने लंबे समय तक चलता रहेगा, लेकिन राहगीरों की दुआओं और आशीर्वाद ने उन्हें लगातार प्रेरित किया. उनका कहना है कि जब कोई प्यासा व्यक्ति पानी पीकर चेहरे पर सुकून लेकर आगे बढ़ता है, तो उन्हें आत्मिक शांति मिलती है.
पालाराम किसी फरिश्ते से कम नहीं !
इस तपती गर्मी में जंगल से गुजरने वाले राहगीरों के लिए पालाराम किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं. कई राहगीरों ने बताया कि दूर-दूर तक पानी की कोई व्यवस्था नहीं है और ऐसे में पालाराम की यह सेवा लोगों के लिए बड़ी राहत बन चुकी है. राहगीरों का कहना है कि गर्मी में ठंडा पानी पीकर उन्हें बहुत सुकून मिलता है और पालाराम का यह प्रयास मानवता की मिसाल है.
सेवा के बदले किसी से कुछ नहीं मांगते पालाराम
हालांकि पालाराम इस सेवा के बदले किसी से कुछ नहीं मांगते लेकिन राह चलते कई लोग खुशी से उन्हें 10 या 20 रुपये दे जाते हैं, ताकि उनका यह नेक काम चलता रहे. आज के दौर में जहां लोग अपने स्वार्थ में व्यस्त हैं, वहीं पालाराम बिना किसी लालच के इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं. उनकी यह सेवा समाज को यह संदेश देती है कि अगर मन में सेवा का भाव हो तो छोटी सी कोशिश भी हजारों लोगों के लिए राहत बन सकती है.
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