हरियाणा के यमुनानगर में मानसून ने फिर डर बढ़ा दिया है. सोम नदी का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुका है. फिलहाल नदी में 9 हजार क्यूसेक पानी रिकॉर्ड किया गया है, जबकि 10 हजार क्यूसेक पर नदी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगती है. तेज बहाव में नदी किनारे खड़े बड़े-बड़े पेड़ भी बह गए हैं. सोम और पथराला नदी से जुड़े निचले इलाकों के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. वहीं प्रशासन भी अलर्ट पर है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है.
नदी किनारे वर्षों से खड़े पेड़ पानी की रफ्तार में जड़ समेत बहे
सोम नदी का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए अब खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुका है. तेज बहाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नदी किनारे वर्षों से खड़े विशाल पेड़ भी पानी की रफ्तार में जड़ समेत बह गए. लगातार बढ़ता जलस्तर अब नदी से सटे निचले इलाकों के लोगों के लिए खतरे की घंटी बन चुका है. ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और प्रशासन भी हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है.
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हाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश जारी रही, तो हालात बिगड़ने की संभावना
हर साल मानसून के दौरान सोम और पथराला नदी अपना रौद्र रूप दिखाती हैं. इन दोनों नदियों का उफान दर्जनों गांवों के लिए बड़ी आफत बन जाता है. खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब जाती हैं, सड़क संपर्क टूट जाता है और कई गांवों का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है.
फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से नीचे जरूर है, लेकिन यदि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश जारी रही तो आने वाले घंटों में हालात और गंभीर हो सकते हैं. ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की जरूरत है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी सोम और पथराला नदी पिछले वर्षों की तरह तबाही मचाएंगी, या फिर प्रशासन की तैयारियां लोगों को सुरक्षित रखने में सफल होंगी?
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