हरियाणा राज्यसभा चुनाव में फंस गया पेंच! कांग्रेस-BJP विधायकों के वोट पर उठे सवाल
Haryana Rajya Sabha Election 2026: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी विधायक और बीजेपी ने कांग्रेस विधायकों के वोट पर सवाल उठा दिए हैं.

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में पेंच फंस गया है. बीजेपी ने कांग्रेस के दो विधायकों के मतदान पर आपत्ति जताई है जबकि कांग्रेस की तरफ से भी एक बीजेपी विधायक के मतदान पर अपत्ति जताई गई है. इन आपत्तियों के निपटारे के बाद मतगणना शुरू होगी. बीजेपी के गौरव गौतम और किशन बेदी ने कांग्रेस के दो वोटों पर सवाल उठाए हैं. वहीं कांग्रेस ने हरियाणा के मंत्री अनिल विज के वोटिंग पर सवाल उठा दिया है. गौरव गौतम बीजेपी के पोलिंग एजेंट हैं और किशन बेदी बीजेपी के चुनाव एजेंट हैं.
किस पार्टी से कौन उम्मीदवार?
हरियाणा में दो सीट पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल चुनाव लड़ रहे हैं. बीजेपी नांदल का समर्थन कर रही है. नांदल ने 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गए थे.
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गुजरात के डिप्टी सीएम बीजेपी के पर्यवेक्षक
मतदान से पहले हिमाचल प्रदेश भेजे गए कांग्रेस के विधायक सुबह नौ बजे मतदान शुरू होने के कुछ ही समय बाद चंडीगढ़ लौट आए. गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी हरियाणा में राज्यसभा चुनावों के पर्यवेक्षक हैं और उन्होंने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस द्वारा अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेजने तथा उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के तरीके को देखकर उन्हें दुख हुआ.
संघवी ने कहा, ‘‘ खबरों के माध्यम से मुझे कांग्रेस विधायकों की जो स्थिति पता चल रही है, उसे देखकर एक जन प्रतिनिधि के रूप में मुझे बहुत दुख हो रहा है. खबरों को पढ़ने से पता चलता है कि कांग्रेस विधायकों को कमरों में जिस तरह से कैद किया गया है, वह उनके अपने विधायकों के प्रति अविश्वास को दर्शाता है.’’
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मंत्री श्याम सिंह राणा समेत बीजेपी के अन्य विधायक - कृष्णा गहलावत, मूल चंद शर्मा और राम कुमार गौतम ने सबसे पहले अपने मताधिकार का उपयोग किया.
अनिल विज व्हील चेयर पर मतदान करने पहुंचे
कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा, चंद्र मोहन और निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल ने भी मतदान किया. हरियाणा के मंत्री अनिल विज मतदान करने के लिए व्हीलचेयर पर पहुंचे, हाल में गिरने से उनके दोनों पैरों की हड्डी टूट गई थी. हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस के 37 विधायक हैं. कांग्रेस के पास 37 विधायक होने का मतलब यह है कि उसके पास अपने उम्मीदवार को सीट जिताने के लिए आवश्यक संख्या बल है.
हालांकि, ‘क्रॉस-वोटिंग’ की स्थिति में समीकरण बदल सकता है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) सचिव एवं राज्य मामलों के सह-प्रभारी प्रफुल्ल गुडाधे ने पत्रकारों से एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि बीजेपी नेता नांदल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान पर उतरे और उन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है, जबकि बीजेपी के पास यहां आवश्यक संख्या नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘यह सब क्या दर्शाता है? क्या यह बीजेपी नहीं है जिसने अप्रत्यक्ष रूप से अपना उम्मीदवार खड़ा किया है, भले ही नांदल उनका आधिकारिक उम्मीदवार न हो? बीजेपी इसी तरह की राजनीति करती है.’’
एक सीट जीतने के लिए 30 वोटों की जरूरत
हरियाणा विधानसभा के 90 सदस्यों में से सत्ताधारी बीजेपी के 48 विधायक हैं, इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के दो विधायक हैं, जबकि तीन निर्दलीय विधायक हैं. इंडियन नेशनल लोकदल के दो विधायकों ने मतदान में शामिल होने का फैसला नहीं किया. ऐसे में 88 विधायकों में से एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 30 वोटों की जरूरत है. हरियाणा में बीजेपी सदस्य किरण चौधरी और राम चंद्र जांगड़ा का कार्यकाल नौ अप्रैल को पूरा होने वाला है.

























