'सफाई करने वाले ही फैलाने लगे गंदगी... इसके लिए जिम्मेदार कौन?' यह सवाल आज पानीपत की सड़कों पर हर कोई पूछ रहा है. अपनी मांगों को लेकर पिछले एक महीने से 'काम छोड़ो' हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों का गुस्सा अब सड़कों पर फूट पड़ा है. प्रशासन और सरकार की अनदेखी से नाराज सफाई कर्मचारियों ने शहर को साफ करने के बजाय खुद ही शहर में गंदगी फैलानी शुरू कर दी है.

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सोमवार (11 मई) को गुस्साए सफाई कर्मचारियों ने विरोध का अनोखा और उग्र तरीका अपनाया. उन्होंने कूड़े से भरी ट्रॉलियां लीं और शहरी विधायक प्रमोद विज के कार्यालय के बाहर जाकर पूरा कूड़ा सड़क पर खाली कर दिया. इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने शहर के मुख्य बाजारों में भी जगह-जगह कूड़ा बिखेर दिया, जिससे दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.

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क्या हैं सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांगें?

सफाई कर्मचारी 1 मई से अपनी 22 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. सफाई कर्मचारी यूनियन के प्रधान नरेश ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि उनकी मुख्य मांगें कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और ठेका प्रथा को पूरी तरह से बंद करना है.

प्रधान नरेश ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर भी वादाखिलाफी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "जींद में आयोजित रैली में सीएम ने घोषणा की थी कि ग्रामीण सफाई कर्मचारियों की सैलरी 6,000 रुपये और शहरी सफाई कर्मचारियों की सैलरी 27,000 रुपये की जाएगी. मुख्यमंत्री ने घोषणा करके वाहवाही तो लूट ली, लेकिन उसे अब तक लागू नहीं किया गया."

प्रधान नरेश ने स्थानीय नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पानीपत जिले में चार विधायक, एक केंद्रीय मंत्री, एक राज्यसभा सांसद और दो राज्य मंत्री हैं, इसके बावजूद उनकी सुनने वाला कोई नहीं है. चुनाव के समय वोट दिलवाने के लिए नेता उनके पीछे-पीछे घूमते हैं और उनकी विशेष ड्यूटी लगाई जाती है, लेकिन अब सबने आंखें मूंद ली हैं.

उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह प्रदर्शन जारी रहेगा. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले 35 दिनों से फायर ब्रिगेड के कर्मचारी भी धरने पर हैं, लेकिन उनकी भी अनदेखी की जा रही है.

कांग्रेस नेता बुल्ले शाह का समर्थन, लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

इस धरने को समर्थन देने के लिए कांग्रेस नेता बुल्ले शाह भी पहुंचे. उन्होंने कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और वेतन बढ़ाने की मांग का पुरजोर समर्थन किया.

बुल्ले शाह ने नगर निगम के 7 करोड़ रुपये के सफाई ठेके पर गंभीर सवाल उठाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. उन्होंने कहा, "शहर की सफाई के लिए 7 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं. इतने बजट में तो शहर की हर गली शीशे की तरह साफ हो जानी चाहिए, लेकिन इसमें भारी भ्रष्टाचार हो रहा है. सफाई का ठेका तो 20 गुना बढ़ गया, लेकिन धरातल पर काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी एक रुपये नहीं बढ़ाई गई."

आखिर जिम्मेदार कौन?

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आखिर 1 मई से धरने पर बैठे इन कर्मचारियों की सुध क्यों नहीं ली जा रही? इसके लिए नगर निगम के अधिकारी और मेयर कोमल सैनी अब तक क्या कर रहे हैं? और जिस तरह से शहरी विधायक प्रमोद विज के कार्यालय के बाहर कूड़ा डाला गया, क्या शहर की इस दुर्दशा के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधि जिम्मेदार नहीं हैं?

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