PAK जासूसी और टेरर फंडिंग मामले में बड़ा अपडेट, आरोपी वकील रिजवान की रिमांड बढ़ी, होंगे खुलासे
Nuh News: पाक जासूसी और टेरर फंडिंग केस में नूंह के वकील रिजवान की रिमांड चार दिन बढ़ा दी गई है. पुलिस हवाला नेटवर्क, फंड ट्रेल और पंजाब कनेक्शन की गहन जांच में जुटी है.

नूंह जिले में चल रहे पाकिस्तानी जासूसी और टेरर फंडिंग मामले में गुरुवार 4 दिसंबर को बड़ी कार्रवाई हुई है. मुख्य आरोपी युवा वकील रिजवान को सीजेएम छवि गोयल की अदालत ने 4 दिन की अतिरिक्त पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है.
वहीं उसके साथी मिठाई विक्रेता अजय अरोड़ा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया. तावडू अस्पताल में मेडिकल के बाद दोनों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट में पेश किया गया और जांच अधिकारियों ने रिमांड की आवश्यकता को लेकर विस्तृत जानकारी अदालत को दी.
रिमांड बढ़ने के पीछे पुलिस की दलीलें
पुलिस के अनुसार रिजवान हवाला चैनलों के जरिए विदेश से धन लेकर पंजाब में देशविरोधी गतिविधियों को फंड करता था. उसके बैंक खातों में भारी संदिग्ध लेनदेन मिले हैं और वह लगातार पंजाब के कई हिस्सों में आना-जाना करता रहा है. पूछताछ में रिजवान ने स्वीकार किया है कि उसने करीब 35 लाख रुपये अजय अरोड़ा को दिए, जबकि अलग-अलग रकम पंजाब के विभिन्न जिलों में भी पहुंचाई गई. अजय ने यह राशि अपने दुकान मालिक परमजीत चड्ढा को दी, जो फिलहाल विदेश में है, और इसी चेन में अमृतसर-जालंधर से गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका सामने आई है.
अब तक इस नेटवर्क में कुल पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और सभी के बैंक खातों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है. एसपी राजेश कुमार ने इस मामले में तीन डीएसपी और दो थाना प्रभारियों की टीम वाला एसआईटी गठित किया है. टीम ने पंजाब के कई दौरों पर संदिग्धों के संपर्कों की जांच की है. पुलिस का कहना है कि रिजवान की नई रिमांड से नेटवर्क के और लिंक, मनी ट्रेल और संभावित विदेशी कनेक्शनों की जानकारी मिलने की उम्मीद है.
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें और रिमांड पर बहस
अदालत में बचाव पक्ष के एडवोकेट मोहम्मद मुस्ताक सिंगारिया ने कहा कि पुलिस ने पहले 8 दिन का रिमांड खत्म होने पर फिर 5 दिन का रिमांड मांगा, लेकिन अदालत ने केवल 4 दिन का रिमांड मंजूर किया. लगभग 10 मिनट की बहस में पुलिस ने कहा कि रिजवान को कई जगह ले जाकर बरामदगी करनी है और कई लिंक की पुष्टि करना अभी बाकी है. हालांकि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इतनी लंबी पूछताछ के बाद भी पुलिस पाक जासूसी के ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है और रिजवान को लगातार सहयोगी और शिक्षित व्यक्ति बताया जाता रहा है.
बचाव पक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि 8 दिन के रिमांड में पुलिस ने न तो कोई मुख्य दस्तावेज बरामद किया और न ही कोई ठोस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रस्तुत किया. अदालत ने सभी पक्षों को सुनकर पुलिस के अनुरोध के मुकाबले कम अवधि की रिमांड देते हुए कहा कि जांच आवश्यक है, लेकिन अधिकारों का संतुलन भी लागू होगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस को रिमांड अवधि में नियमों के अनुरूप जांच करनी होगी.
रिजवान के परिजनों के बयान और आगे की जांच से जुड़ी संभावनाएं
मुख्य आरोपी रिजवान के रिश्तेदार उजेफा एडवोकेट ने दावा किया कि रिजवान एक शिक्षित, शांत और विनम्र व्यक्ति है और उसके खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविकता पर आधारित नहीं लगते. उनका कहना है कि पुलिस अब तक कोई निर्णायक बरामदगी साबित नहीं कर पाई है और रिजवान जल्द बरी हो सकता है. उधर पुलिस का कहना है कि हवाला नेटवर्क बड़े पैमाने पर फैला हुआ है और कई लिंक पंजाब के अलावा अन्य राज्यों तक पहुंचते हैं, जिनकी पुष्टि रिजवान से पूछताछ में संभव है.
फिलहाल मामला तावडू सदर थाने में दर्ज है और SIT जांच तेजी से आगे बढ़ा रही है. पुलिस टीम विदेशी फंडिंग, हवाला चैनलों, बैंक लेनदेन, फोन डेटा और पंजाब कनेक्शन के हर पहलू को खंगाल रही है. जांच अधिकारियों का कहना है कि अगले चार दिनों की रिमांड इस पूरे जासूसी और फंडिंग नेटवर्क का वास्तविक स्वरूप सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. मामले का अगला अपडेट पुलिस की पूछताछ रिपोर्ट और संभावित बरामदगी पर निर्भर करेगा.
Source: IOCL






















