करनाल में स्थित अटल किसान मजदूर कैंटीन में 500 ग्राम वेस्ट प्लास्टिक के बदले में भर पेट खाना दिया जा रहा है. महिलाओं के एक समूह ने स्वच्छता को लेकर एक अलग मिसाल बनाई है. किसान और मजदूर के साथ गरीब लोग भी 500 ग्राम वेस्ट प्लास्टिक देकर खाना खाकर अपना पेट भरते हैं.
मजदूरों के लिए गई थी कैंटीन की शुरुआत
अटल किसान मजदूर कैंटीन में मौजूद सुमन डांगी नाम की महिला ने बताया किसान मजदूरों के लिए कैंटीन की शुरुआत की गई थी. लेकिन अब इसमें एक नई शुरुआत की गई है. 500 ग्राम वेस्ट प्लास्टिक लेकर आओ और भर पेट खाना खाओ. सुमन ने बताया 10 रुपये की प्लेट जो हम किसान मजदूर को देते हैं वही प्लेट हम उन्हें देते हैं जो 500 ग्राम प्लास्टिक लेकर आते हैं. उन्होंने बताया बुजुर्ग, बच्चे और गरीब तबके के लोग वेस्ट प्लास्टिक लेकर आते हैं.
'सरकार से मिल रहा है सहयोग'
सुमन बताती है कि स्वच्छता को देखते हुए हमने कदम उठाया है. जगह-जगह पर प्लास्टिक बिखरी रहती थी. जिसके बाद हमने एक विचार किया और साथ जुड़ी महिलाओं और हमारे सीनियर ने बहुत सहयोग किया. साथ-साथ सरकार की और से भी हमे पूरा सहयोग मिल रहा है. साफ सफाई के साथ लोगों का पेट भी भर रहा है. उन्होंने बताया यहां खाने में रोजाना दो सब्जी ,चावल, रोटी, लस्सी, सिर्फ 10 रुपये में मिलती है. 500 ग्राम वेस्ट प्लास्टिक लाने वालो को भी यही दिया जाता है.
कैसे आया प्लास्टिक वाला आइडिया?
इसके आगे उन्होंने बताया अटल किसान मजदूर की शुरुआत 2019 में की गई थी. यहां मंडी में कुछ बच्चे आते थे और यहां पर लोगों से पैसे मांगते थे ताकि खाना खा सकें. हमने उन बच्चों को कहा आप लोगो से पैसे मांगने की बजाए जो ईधर उधर वेस्ट प्लास्टिक पड़ा रहता है, उसे लेकर आओ और यहां खाना खाओ. इस तरह से इसकी शुरुआत हुई. अब तक 15 सौ किलो से ज्यादा प्लास्टिक इकट्ठा कर कबाड़ वालों को बेचा गया है और तीन हजार से अधिक भोजन परोसे जा चुके हैं.
बता दें कि सुमन एक महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित अटल किसान मजदूर कैंटीन में काम करती हैं. वह अपने साथ पांच से छह स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के रोजगार का साधन बनी हुई हैं.