हरियाणा में दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) के कर्मचारियों की दो दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल का आज (10 अप्रैल) दूसरा दिन है. फरीदाबाद में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले दो फायरकर्मियों को न्याय दिलाने और अपनी अन्य मांगों को लेकर गुरुग्राम में भी फायरकर्मी काम छोड़कर धरने पर बैठे हैं. पहले दिन अधिकारियों और मंत्री स्तर पर हुई बातचीत बेनतीजा (विफल) रही, जिसके बाद आज दूसरे दिन भी कर्मचारियों का धरना जारी है.

Continues below advertisement

क्या हैं फायर कर्मचारियों की मुख्य मांगें?

करीब दो महीने पहले फरीदाबाद में एक भीषण आग को बुझाने के दौरान दो दमकलकर्मियों की दर्दनाक मौत हो गई थी. विभाग के कर्मचारी इसी घटना को लेकर रोष में हैं. उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • शहीद का दर्जा: ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले दोनों फायर कर्मचारियों को 'शहीद' का दर्जा दिया जाए.
  • आर्थिक मदद और नौकरी: मृतकों के आश्रितों को 1-1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि (अनुदान) और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.
  • कच्चे कर्मचारी हों पक्के: फायर विभाग में लंबे समय से काम कर रहे कच्चे कर्मचारियों को विभाग में खाली पड़े पदों पर तुरंत पक्का (Regular) किया जाए.

'मांगें नहीं मानीं तो करेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल'

धरने का नेतृत्व कर रहे फायर विभाग के जिला प्रधान साउंड खान और भीम नगर फायर स्टेशन के लखबीर यादव ने अपनी बाइट में स्पष्ट किया कि वे अपने शहीद साथियों के हक के लिए लड़ रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दो दिन के इस राज्यव्यापी धरने के बाद भी सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है, तो पूरे प्रदेश के फायरकर्मी 'अनिश्चितकालीन हड़ताल' (Indefinite Strike) पर चले जाएंगे.

Continues below advertisement

शहर की सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल

फायरकर्मियों की इस हड़ताल ने पूरे प्रदेश और विशेषकर गुरुग्राम जैसे बड़े शहर की सुरक्षा व्यवस्था को रामभरोसे छोड़ दिया है. गनीमत यह रही कि इन दो दिनों में आगजनी की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि फायर स्टेशनों पर गाड़ियां खड़ी हैं और कर्मचारी धरने पर हैं, तो किसी आपात स्थिति में आग बुझाने कौन जाएगा? यदि अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू होती है और कोई बड़ा हादसा हो जाता है, तो उस जान-माल के नुकसान का जिम्मेदार आखिर कौन होगा?