गुजरात से लोकसभा सांसद मनसुख वसावा ने रविवार  (1को कहा कि भारतीय जनता पार्टी को उनकी भरूच सीट के लिए अन्य उम्मीदवारों को मौका देना चाहिए। इससे यह संकेत मिलता है कि वसावा भविष्य में संसदीय चुनाव नहीं भी लड़ सकते हैं।

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सात बार भाजपा से सांसद रह चुके मनसुख वसावा 2014 से 2016 के बीच जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री भी रहे। वसावा ने मीडिया से कहा, 'भारतीय जनता पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। अब उसे मेरी जगह अन्य पार्टी कार्यकर्ताओं को मौका देने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।'

आदिवासी नेता हैं  मनसुख वासावा

मनसुख वसावा एक वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं। वह 1998 से आदिवासी बहुल भरूच से सांसद हैं। उन्होंने कहा, 'भरूच की सीट के सामान्य होने के बावजूद, भाजपा ने मुझे चुनाव जीतने में मदद की है। मुझे अन्य कार्यकर्ताओं को भी मौका देना चाहिए और पार्टी को भी इस दिशा में सोचना चाहिए।'

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उन्होंने कहा कि भाजपा एक अनुशासित पार्टी है, जो युवाओं को प्राथमिकता देती है। वसावा ने कहा, ‘‘इसलिए मेरी इच्छा है कि मेरी जगह पर पार्टी किसी अन्य उम्मीदवार का चयन करे। उनका कहना है वे 2029 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे.

टिकट वितरण नियमों पर जताई चिंता

इससे पहले, उन्होंने राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवार के चयन के लिए पार्टी द्वारा लागू किए गए नियमों के खिलाफ अपनी राय व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि ये नियम पार्टी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस बीच उन्होंने टिकट वितरण नियमों को लेकर पार्टी पर आरोप लगाते हुए चिंता जाहिर की थी.

उन्होंने कहा कि पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया, लेकिन अब दूसरों की बारी है. उन्हें भी मौका मिलना चाहिए. बीजेपी ने वसावा के ऊपर कई बार भरोसा जताया. उन्हें साल 1995 में राजपीपला से विधायक बनाया गया था. इसके अलवा वे केशूभाई पटेल की सरकार में मंत्री भी रहे. साल 1998 से मनसुख वसावा लगातार लोकसभा चुनाव जीतते रहे हैं. 

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