Gujarat Assembly Election 2022: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है, जो अगले महीने दो चरणों में होने वाले हैं. राज्य में कांग्रेस पिछले 27 साल से सत्ता में रही बीजेपी को हराने की पूरी कोशिश कर रही है. मुसलमानों को आमतौर पर कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता है. हालांकि, राज्य में आगामी चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) और एआईएमआईएम के कांग्रेस के लिए खेल बिगाड़ने की संभावना है.
हालांकि आप (AAP) बीजेपी को भी कड़ी चुनौती दे रही है, एआईएमआईएम (AIMIM) उन निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने जा रही है जहां मुस्लिम और दलित बहुल हैं. इससे बीजेपी को फायदा हो सकता है क्योंकि वोट बंटने की संभावना है.
कांग्रेस 'KHAM' फॉर्मूले पर कर रही फोकसकांग्रेस वर्तमान में क्षत्रिय ओबीसी, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम (KHAM) मतदाताओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जो कुल मतदाताओं का 75 फीसदी हैं. KHAM फॉर्मूले ने कांग्रेस को 1985 में 182 में से 149 सीटें जीतने में मदद की थी. हालांकि, कहा जा रहा है कि गुजरात में AIMIM और AAP कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ सकती है. कई सीटों पर वोट के बंटने की संभावना है.
एआईएमआईएम ने अब तक गुजरात विधानसभा के लिए 182 में से 14 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. एआईएमआईएम की तरफ से जारी की गई दूसरी लिस्ट के अनुसार कल्पेश भाई सुंधिया वडगाम से चुनाव लड़ेंगे, अब्बास भाई नोडसोला सिद्धपुर विधआनसभा से चुनाव लड़ेंगे और जैनबीबी शेख वेजलपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी. एआईएमआईएम के चुनाव लड़ने से अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगी जिसको मुस्लिम वोट मिलता रहा है.
गुजरात में 2011 की जनगणना के अनुसार, गुजरात में हिंदू बहुसंख्यक हैं. हिंदू धर्म गुजरात की आबादी का 88.57 फीसदी है. गुजरात में मुस्लिम आबादी कुल 6.04 करोड़ में से 58.47 लाख (9.67 प्रतिशत) है. अब आपको बता दें कि गुजरात में मुस्लिम आबादी बेशक कम हो लेकिन 34 विधानसभा क्षेत्रों में, मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 15 फीसदी से अधिक है.
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