गुजरात में AAP को बड़ा झटका, चैतर वसावा की विधायकी खत्म, खाली हुई सीट
Chaitar Vasava News: गुजरात में आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा की विधानसभा की सदस्यता खत्म हो गई. गुजरात के डिप्टी स्पीकर ने इसकी जानकारी दी.

गुजरात के राजपीपला की एक सत्र अदालत ने मंगलवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक चैतर वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा और सात अन्य व्यक्तियों को वन अधिकारियों पर हमले और जबरन वसूली के एक मामले में दोषी ठहराते हुए सात-सात साल कारावास की सजा सुनाई. इसके बाद गुजरात विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद आप विधायक चैतर वसावा अब विधायक नहीं रहे. कानून के मुताबिक उनकी सीट अब खाली मानी जाएगी.
क्या है पूरा मामला?
घटना 30 अक्टूबर 2023 को हुई थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन विभाग के अधिकारियों ने सरकारी भूमि पर अवैध रूप से उगाई गई कपास की फसल हटायी थी, जिसके बाद विवाद उत्पन्न हो गया था. अभियोजन के अनुसार अधिकारियों को मुद्दे पर चर्चा के लिए नर्मदा जिले में डेडियापाड़ा कस्बे स्थित विधायक वसावा के आवास पर बुलाया गया. पुलिस ने बताया कि डेडियापाड़ा (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले आदिवासी नेता वसावा ने अपने घर पर अधिकारियों को धमकाया, उनमें से एक को थप्पड़ मारा और पिस्तौल से हवा में गोली चलाई.
पिस्तौल छिपाकर या ठिकाने लगाकर सबूत मिटा दिए- पुलिस
पुलिस ने बताया कि वसावा की पत्नी समेत आरोपियों ने फसल हटाने के बदले वन अधिकारियों से कुल 60000 रुपये वसूले और बाद में वसावा ने पिस्तौल छिपाकर या ठिकाने लगाकर सबूत मिटा दिए. वसावा के निजी सहायक जितेंद्र वसावा पर आरोप था कि उन्होंने फ़ोन पर विधायक से संपर्क किया और उनसे उगाही की रकम लेने के लिए आने को कहा.
विधायक वसावा, उनकी पत्नी और सात अन्य के खिलाफ दंगा, उगाही तथा सरकारी अधिकारियों पर हमले से संबंधित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. उनके खिलाफ शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी आरोप लगाए गए थे. आरोप 7 अगस्त, 2025 को तय किए गए.
कुल 17 गवाहों से जिरह की गई
विशेष लोक अभियोजक अमित नायर ने कहा, 'सुनवायी के दौरान अभियोजन पक्ष के कुल 17 गवाहों से जिरह की गई और कई दस्तावेजी सबूत पेश किए गए. सभी गवाहों ने हमारे मामले का समर्थन किया. हमने अधिकतम 10 साल की सज़ा का अनुरोध किया और दलील दी कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि से हिंसा का सहारा लेने के बजाय कानूनी रास्ते अपनाने की उम्मीद की जाती है, और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है.'
सुनवायी के दौरान, नायर ने दलील दी कि गवाहों के बयान, दस्तावेजी सबूत, कॉल रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट से आरोपी की संलिप्तता साबित हुई. उन्होंने वसावा के खिलाफ हाल ही में दर्ज अन्य प्राथमिकी का भी जिक्र किया, जिनमें मारपीट और सार्वजनिक अव्यवस्था फैलाने जैसे अपराधों के लिए उनका नाम था.
हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से खारिज हुई अर्जी
अंतिम जिरह के चरण में, वसावा के वकीलों ने अभियोजन पक्ष के कुछ गवाहों को दोबारा बुलाने की मांग की, लेकिन सत्र अदालत ने इस अर्ज़ी को खारिज कर दिया. इस फैसले के खिलाफ अपील को गुजरात हाई कोर्ट ने 7 मई, 2026 को और सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को खारिज कर दिया. इसके बाद आरोपियों ने बचाव पक्ष के गवाहों से जिरह की अनुमति के लिए अर्ज़ी दायर की, जबकि पहले उसने ऐसा न करने का फैसला किया था. इस अर्ज़ी को भी सत्र अदालत और बाद में हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया.
5 जुलाई 2025 को गिरफ्तार हुए वसावा
आप विधायक को 5 जुलाई, 2025 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 के तहत हत्या के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. आरोप है कि उन्होंने एक बैठक के दौरान तालुका पंचायत अध्यक्ष पर हमला किया था. पिछले साल सितंबर में जमानत देते हुए उच्च न्यायालय ने शर्त रखी थी कि वह एक साल तक डेडियापाड़ा तालुका में प्रवेश नहीं करेंगे.
अप्रैल 2026 में, भरूच जिले के झगड़िया जीआईडीसी पुलिस थाने में वसावा और कुछ अन्य स्थानीय नेताओं के खिलाफ तीन प्राथमिकी दर्ज की गईं. यह मामला तब हुआ जब वह आग की घटना के पीड़ितों के लिए मुआवज़े की मांग करने एक फैक्ट्री में गए थे, जहां उन्होंने एक व्यक्ति को थप्पड़ मारा और बदले में उसने भी उन्हें थप्पड़ मारा.





















